Ballygunge Family Trust, Shankara Building Products में 26% हिस्सेदारी के लिए ₹150 प्रति शेयर के भाव पर ओपन ऑफर (Open Offer) ला रही है। इसका मकसद SEBI नियमों का पालन करना और प्रमोटरों की हिस्सेदारी को मजबूत करना है।
Shankara Building Products में खुला ऑफर
Shankara Building Products लिमिटेड के लिए एक बड़ा डेवलपमेंट आया है। The Ballygunge Family Trust और इससे जुड़े लोग (Persons Acting in Concert - PACs) कंपनी के 26.00% यानी 63,04,825 इक्विटी शेयर खरीदने जा रहे हैं। इस ऑफर का भाव ₹150 प्रति शेयर रखा गया है। यह ऑफर 7 सितंबर, 2026 से 21 सितंबर, 2026 तक खुला रहेगा।
ये ऑफर क्यों?
फिलहाल The Ballygunge Family Trust के पास Shankara Building Products का 49.52% हिस्सा है। SEBI (SAST) रेगुलेशंस के तहत नियमों का पालन न करने की वजह से, उन्हें यह ओपन ऑफर लाना पड़ रहा है। इस कदम से प्रमोटर ग्रुप अपनी हिस्सेदारी को और मजबूत करेगा और रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करेगा। साथ ही, यह मौजूदा शेयरधारकों के लिए ₹150 के फिक्स भाव पर बाहर निकलने का मौका भी दे रहा है।
कंपनी की पृष्ठभूमि
Shankara Building Products मुख्य रूप से स्टील ट्यूब, कोल्ड रोल्ड स्ट्रिप्स और रूफिंग प्रोडक्ट्स का निर्माण करती है। जनवरी 2026 में, कंपनी ने अपने 'ट्रेडिंग बिजनेस' को Shankara Buildpro Limited में डीमर्ज (Demerge) किया था, जिससे कंपनी की ऑपरेशनल संरचना में बदलाव आया था।
क्या बदलेगा?
अगर यह ओपन ऑफर पूरी तरह से सब्सक्राइब हो जाता है, तो एक्वायरर (Acquirer) की हिस्सेदारी 49.52% से बढ़कर 75.52% हो जाएगी। कंपनी का इरादा मौजूदा बिजनेस को आगे जारी रखने का है।
जोखिम (Risks)
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक्वायरर ने इस ऑफर के दौरान या बाद में शेयर की मार्केट प्राइस को लेकर कोई गारंटी नहीं दी है। निवेशकों को अपने शेयर ऑफर में बेचने या न बेचने का फैसला खुद लेना होगा।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस (FY2026)
FY2026 के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का कंसोलिडेटेड इनकम (Consolidated Income) ₹1,364.01 करोड़ रहा, जो FY2025 के ₹1,362.47 करोड़ से मामूली ज्यादा है। वहीं, कंपनी ने FY2026 में ₹3.84 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Profit After Tax - PAT) दर्ज किया है, जबकि पिछले साल FY2025 में ₹0.79 करोड़ का घाटा था।
आगे क्या?
निवेशकों को इस ओपन ऑफर के सफल समापन पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, ऑफर के बाद की रेगुलेटरी आवश्यकताओं और डीमर्जर व प्रमोटर हिस्सेदारी समेकन के बाद कंपनी के प्रदर्शन पर भी ध्यान देना होगा।
