Sanwaria Consumer Ltd को लिक्विडेट (Liquidation) किया जाएगा क्योंकि Creditors ने सभी Resolution Plans को रिजेक्ट कर दिया है। NCLT ने मई 2020 में कंपनी को CIRP के तहत लाया था। ऑडिटर ने अकाउंटिंग से जुड़ी गंभीर चिंताएं और मानकों के पालन न होने की बात कही है।
Sanwaria Consumer Ltd अब Liquidation की ओर
Sanwaria Consumer Ltd अब लिक्विडेशन (Liquidation) की प्रक्रिया में जाने वाली है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कंपनी के लेनदारों (Creditors) की समिति (Committee of Creditors - CoC) किसी भी पेश किए गए रेसोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) को मंजूरी नहीं दे पाई। अब लिक्विडेशन के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में अर्जी दाखिल की गई है।
मुख्य बातें: लिक्विडेशन की प्रक्रिया शुरू; ऑडिटर ने अकाउंटिंग पॉलिसी में बड़े उलटफेर और एसेट वैल्यूएशन पर चिंता जताई है।
क्या हुआ?
Sanwaria Consumer Ltd, जो 29 मई 2020 से कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेसोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत थी, अब लिक्विडेशन के फेज में पहुँच गई है। CoC को कोई भी रेसोल्यूशन प्लान मंजूर नहीं लगा और इसी के चलते कंपनी की संपत्तियों को बेचने का फैसला लिया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फैसला दिखाता है कि रेसोल्यूशन प्लान के जरिए कंपनी को बचाने की कोशिशें नाकाम रही हैं। लिक्विडेशन का मतलब है कि कंपनी की संपत्तियों को बेचकर लेनदारों का पैसा चुकाया जाएगा, और शेयरधारकों को अपने निवेश से कुछ भी वापस मिलने की संभावना बहुत कम है। ऑडिटर की टिप्पणियां कंपनी की वित्तीय गड़बड़ियों और नियमों का पालन न करने की ओर इशारा करती हैं, जो कंपनी के संकट को और बढ़ाती हैं।
पूरी कहानी
NCLT के आदेश के बाद कंपनी मई 2020 से CIRP के अधीन थी। इस दौरान कंपनी को बचाने के लिए एक व्यवहार्य रेसोल्यूशन प्लान खोजने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। वर्तमान निर्णय इसी प्रयास के अंत का संकेत देता है।
अब क्या बदलेगा?
अब ध्यान रेसोल्यूशन से हटकर लिक्विडेशन पर होगा। एक लिक्विडेटर (Liquidator) नियुक्त किया जाएगा जो कंपनी की संपत्तियों को बेचेगा। प्राप्त राशि का वितरण इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के नियमों के अनुसार लेनदारों के बीच किया जाएगा। कंपनी के डायरेक्टर्स का बोर्ड पहले से ही निलंबित है।
जोखिम
इसमें संपत्ति का सही मूल्यांकन, लेनदारों के भुगतान पर संभावित विवाद, और ऑडिटर द्वारा उजागर की गई कंपनी की अकाउंटिंग प्रैक्टिस और निर्धारित मानकों के बीच विसंगति जैसे बड़े जोखिम शामिल हैं। कंपनी ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹0.2652 करोड़ की कुल आय पर ₹0.5479 करोड़ (स्टैंडअलोन) और ₹0.8925 करोड़ (कंसॉलिडेटेड) का नेट लॉस दर्ज किया था।
ऑडिटर की टिप्पणियां
स्टैच्यूटरी ऑडिटर, हुसैन शबीर एंड कंपनी (Hussain Shabbir and Co.), ने अपनी समीक्षा में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं:
- खर्चों को कैश बेसिस पर दर्ज किया गया है, जो कंपनी की बताई गई पॉलिसी के विपरीत है।
- इनसॉल्वेंसी शुरू होने की तारीख (29 मई 2020) से उधार पर लगे ब्याज को दर्ज नहीं किया गया है, जो Ind AS 23 और Ind AS 109 का उल्लंघन है।
- टैंगिबल एसेट्स का मूल्य ₹54.11 करोड़ है, लेकिन Ind AS 36 के अनुसार आवश्यक इंपेयरमेंट असेसमेंट (impairment assessment) नहीं किया गया है।
- बैंक बैलेंस की पुष्टि की जानी है, जिसमें बहुत कम गतिविधि दर्ज की गई है।
संदर्भ मेट्रिक्स (30.06.2026 को समाप्त तिमाही)
- कुल आय (स्टैंडअलोन/कंसॉलिडेटेड): ₹0.2652 करोड़ (26.52 लाख)
- नेट प्रॉफिट/(लॉस) (स्टैंडअलोन): ₹(0.5479) करोड़ ((54.79) लाख)
- नेट प्रॉफिट/(लॉस) (कंसॉलिडेटेड): ₹(0.8925) करोड़ ((89.25) लाख)
आगे क्या देखें
निवेशकों को लिक्विडेटर की नियुक्ति, संपत्ति की बिक्री की प्रक्रिया और पैसों के वितरण पर नजर रखनी चाहिए। NCLT द्वारा लिक्विडेशन प्रक्रिया के संबंध में कोई भी अतिरिक्त स्पष्टीकरण या कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
