Mediaone Global पर SEBI का शिकंजा! ₹99 करोड़ से ज्यादा का फंड डायवर्जन, ₹143 करोड़ की फर्जी कमाई का खुलासा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Mediaone Global पर SEBI का शिकंजा! ₹99 करोड़ से ज्यादा का फंड डायवर्जन, ₹143 करोड़ की फर्जी कमाई का खुलासा

SEBI ने Mediaone Global Entertainment Ltd के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। कंपनी पर ₹99.48 करोड़ के फंड डायवर्जन, ₹143.05 करोड़ की फर्जी कमाई और डिविडेंड (Dividend) न देने का आरोप है। कंपनी और उसके डायरेक्टर्स पर बाजार से पाबंदी और भारी जुर्माना लगाया गया है।

SEBI का Mediaone Global Entertainment Ltd पर सख्त रुख

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने Mediaone Global Entertainment Ltd के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अपना अंतिम आदेश जारी कर दिया है। जांच में पाया गया कि कंपनी ने Eros International से प्राप्त लगभग ₹99.48 करोड़ का फंड डायवर्ट किया, जो फंड की राउंड-ट्रिपिंग (Round-tripping) से साबित हुआ है।

इतना ही नहीं, SEBI ने वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2015-16 के बीच ₹143.05 करोड़ की फर्जी कमाई (Fictitious Revenue) का भी खुलासा किया है। यह राशि उस अवधि की रिपोर्टेड कमाई का लगभग 48.26% थी। कंपनी ने फर्जी जर्नल एंट्रीज (Journal Entries) के जरिए अकाउंटिंग में भी गड़बड़ियां कीं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

SEBI का यह फैसला कंपनी में सुनियोजित वित्तीय हेरफेर (Financial Manipulation) और खराब कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) को उजागर करता है, जिसका सीधा असर शेयरधारकों के भरोसे और कंपनी के मूल्य पर पड़ता है। अब कंपनी को डायवर्ट किए गए फंड को वसूलना होगा और उसके डायरेक्टर्स पर बाजार से पाबंदी जैसी कार्रवाई होगी। कंपनी द्वारा घोषित डिविडेंड (Dividend) का भुगतान न करना और इस देनदारी को गलत तरीके से दिखाना शेयरधारकों के अधिकारों की घोर अवहेलना है।

क्या है पूरा मामला?

Mediaone Global Entertainment Ltd ने वित्तीय वर्ष 2013-14 में ₹178.50 करोड़ की कमाई बताई थी, जो वित्तीय वर्ष 2023-24 तक घटकर सिर्फ ₹19.82 करोड़ रह गई। कंपनी वित्तीय वर्ष 2010-11 और 2011-12 के घोषित डिविडेंड का भुगतान करने में विफल रही, जिससे ₹2.31 करोड़ की बकाया देनदारी बन गई। इस पर 27 फरवरी, 2026 तक ₹3.86 करोड़ का ब्याज भी जुड़ गया था।

अब आगे क्या?

SEBI ने Mediaone Global को निर्देश दिया है कि वह ₹99.48 करोड़ के डायवर्टेड फंड को वसूलने और उसे वापस लाने के लिए कानूनी कार्रवाई करे। कंपनी और उसके प्रमुख प्रबंधन कर्मियों को 2 से 3 साल की अवधि के लिए सिक्योरिटीज मार्केट (Securities Market) से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा, कंपनी को लावारिस डिविडेंड और उस पर लगे ब्याज, जो कुल ₹6.17 करोड़ है, को निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष (Investor Education and Protection Fund - IEPF) में ट्रांसफर करना होगा।

निवेशकों के लिए जोखिम

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कंपनी डायवर्ट किए गए फंड को कितनी प्रभावी ढंग से वसूल पाती है और प्रबंधन पर लगी पाबंदी का कंपनी के भविष्य के संचालन और रणनीतिक फैसलों पर क्या असर पड़ता है। SEBI द्वारा लगाए गए जुर्माने भी कंपनी पर वित्तीय बोझ डालेंगे।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशकों को कंपनी द्वारा डायवर्टेड फंड की वसूली में की जा रही प्रगति और IEPF में फंड ट्रांसफर करने के अनुपालन पर नजर रखनी चाहिए। प्रबंधन पर लगी पाबंदी के दौरान कंपनी का नेतृत्व कौन करेगा और वह कैसे काम करती है, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा।

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