SEBI (सेबी) ने 2017 से 2020 के बीच शेयर बाजार में हेरफेर करने वाले 226 संस्थाओं पर 7 साल तक का बैन लगा दिया है। इन पर Mauria Udyog Ltd. जैसी 5 कंपनियों के शेयर के दाम और वॉल्यूम को गलत तरीके से बढ़ाने का आरोप है।
SEBI का बाजार में हेरफेर करने वालों पर शिकंजा!
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में हेरफेर करने वाली 226 संस्थाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इन पर 2017 से 2020 के बीच पांच सूचीबद्ध कंपनियों, जिनमें Mauria Udyog Ltd. (MUL), Vishal Fabrics Ltd. (VFL), 7NR Retail Ltd. (7NR), Darjeeling Ropeway Company Ltd. (DRCL), और GBL Industries Ltd. (GBL) शामिल हैं, के शेयर की कीमतों और वॉल्यूम को कृत्रिम रूप से बढ़ाने का आरोप है। SEBI ने इन संस्थाओं पर 7 साल तक का प्रतिबंध लगाया है।
कैसे चला हेरफेर का खेल?
SEBI की जांच में पता चला कि 'PV Influencers', 'Collaborators' और 'Offloaders' के एक जटिल नेटवर्क ने मिलकर इन शेयरों में हेरफेर को अंजाम दिया। अकेले Mauria Udyog Ltd. (MUL) के मामले में, अवैध रूप से ₹143.79 करोड़ कमाए गए। हेरफेर की अवधि के दौरान, MUL के शेयर की कीमत में 61.32% की वृद्धि हुई और ट्रेडिंग वॉल्यूम में 1638% का इजाफा हुआ, जबकि कंपनी सितंबर 2019 की तिमाही में ₹12.65 करोड़ के नेट लॉस और 35% राजस्व गिरावट का सामना कर रही थी।
क्यों है यह कार्रवाई महत्वपूर्ण?
यह नियामक कार्रवाई शेयर बाजार में धोखाधड़ी के खिलाफ एक मजबूत चेतावनी है। यह विशेष रूप से कम लिक्विडिटी वाले शेयरों (illiquid scrips) में मूल्य हेरफेर में शामिल संस्थाओं के लिए गंभीर परिणामों को रेखांकित करती है। प्रतिबंधों के साथ-साथ मौद्रिक दंड और अवैध लाभ की वसूली (disgorgement) से प्रभावित पक्षों पर गहरा असर पड़ेगा।
जानिए पूरी कहानी
इस योजना को तीन चरणों में अंजाम दिया गया: पहला, संरचित ट्रेडों (structured trades) के माध्यम से कृत्रिम रूप से मूल्य और वॉल्यूम बनाना; दूसरा, प्रतिष्ठित ब्रोकर्स और फर्जी 'बाय' सिफारिशों की नकल करने वाले बल्क एसएमएस (Bulk SMS) अभियानों के माध्यम से खुदरा निवेशकों को लुभाना; और तीसरा, फुलाए गए दामों पर भोले-भाले खुदरा निवेशकों को शेयर बेचना। बाद में, फंड को छिपाने के लिए बिचौलिए संस्थाओं और फॉरेक्स कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया।
अब क्या बदलेगा?
सभी 226 आरोपित संस्थाओं को प्रतिभूति बाजार से 4 से 7 साल तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। कथित मास्टरमाइंड Hanif Shekh पर ₹10 करोड़ का जुर्माना सहित मौद्रिक दंड लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, इन संस्थाओं को 12% वार्षिक ब्याज के साथ अपने अवैध लाभ को वापस करना होगा।
जोखिमों पर एक नजर
यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि कम लिक्विडिटी वाले छोटे शेयरों में निवेश करने में कितना बड़ा जोखिम है, खासकर जब उनमें किसी फंडामेंटल सपोर्ट के बिना असामान्य मूल्य और वॉल्यूम मूवमेंट दिखाई दे। निवेशकों को अनचाही निवेश सलाह से, खासकर डिजिटल माध्यमों से, बहुत सावधान रहना चाहिए।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को SEBI के आदेश के प्रवर्तन की निगरानी करनी चाहिए, जिसमें जब्त किए गए लाभों की वसूली भी शामिल है। बाजार यह भी देखेगा कि हेरफेर के नए पैटर्न सामने आते हैं या नहीं और SEBI की निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता कैसी रहती है।
