Renaissance Global Ltd को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब BSE और NSE ने Amit Chandrakant Shah को 'प्रमोटर' से 'पब्लिक' कैटेगरी में बदलने की अर्जी को ठुकरा दिया। इस फैसले का मुख्य कारण Kothari Descendants Private Trust के पास मौजूद **12.17%** की हिस्सेदारी है, जो SEBI की **10%** की तय सीमा से ज्यादा है।
प्रमोटर स्टेटस पर सवाल
BSE और NSE ने साफ कर दिया है कि कंपनी के मौजूदा स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं होगा। एक्सचेंज द्वारा की गई जांच में पाया गया कि प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी संस्था, 'Kothari Descendants Private Trust', कंपनी में 12.17% वोटिंग राइट्स रखती है।
क्यों खारिज हुई अर्जी?
SEBI की Regulation 31A(3)(b) के तहत, कोई भी प्रमोटर जो अपनी कैटेगरी 'पब्लिक' में शिफ्ट करना चाहता है, उसके पास 10% से ज्यादा वोटिंग राइट्स नहीं होने चाहिए। इसके अलावा, कंपनी के कामकाज पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होना चाहिए। चूंकि आवेदक का परिवार इस ट्रस्ट से सीधे तौर पर जुड़ा है, इसलिए यह अर्जी नियमों के दायरे में फिट नहीं बैठी।
आगे क्या?
फिलहाल, Amit Chandrakant Shah कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में 'प्रमोटर' के तौर पर ही बने रहेंगे। भविष्य में अगर कंपनी को फिर से रीक्लासिफिकेशन के लिए आवेदन करना है, तो उन्हें अपनी हिस्सेदारी या नियंत्रण लिंक में बड़ा बदलाव करना होगा, जो SEBI के सख्त नियमों के तहत काफी चुनौतीपूर्ण है।
