Reliance Communications (RCOM) पर DoT का शिकंजा: **₹5.72 करोड़** के बैंक गारंटी हुए एन्कैश

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AuthorMehul Desai|Published at:
Reliance Communications (RCOM) पर DoT का शिकंजा: **₹5.72 करोड़** के बैंक गारंटी हुए एन्कैश

Reliance Communications (RCOM) और उसकी सब्सिडियरी Reliance Telecom की बैंक गारंटी (Bank Guarantees) को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने **₹5.72 करोड़** की राशि के लिए आंशिक रूप से एन्कैश (encash) कर लिया है। यह कदम फाइनेंशियल ईयर 2023-24 से 2025-26 के लिए लाइसेंस फीस के भुगतान में डिफॉल्ट के कारण उठाया गया है। कंपनी इसके वित्तीय और कानूनी प्रभावों का आकलन कर रही है।

DoT ने क्यों की कार्रवाई?

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने Reliance Communications (RCOM) और उसकी सब्सिडियरी Reliance Telecom द्वारा लाइसेंस एग्रीमेंट्स के पालन के लिए दी गई फाइनेंशियल बैंक गारंटी (FBGs) को आंशिक रूप से एन्कैश करने का फैसला किया है। कुल मिलाकर ₹5.72 करोड़ की राशि एन्कैश की गई है।

इसमें RCOM की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ ₹5,55,42,271 की FBG है, जो UAS सेवाओं के लिए है और 23 जनवरी, 2027 को एक्सपायर होनी थी। वहीं, Reliance Telecom Limited की बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ ₹16,25,000 की गारंटी, जो UL-Access सेवाओं के लिए है और 23 जून, 2027 को एक्सपायर होनी थी, उसे भी एन्कैश किया गया है।

डिफॉल्ट का मामला

DoT ने इन गारंटियों को इसलिए एन्कैश किया क्योंकि कंपनी पर फाइनेंशियल ईयर 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए लाइसेंस फीस का बकाया था। यह कार्रवाई RCOM पर चल रहे फाइनेंशियल और कंप्लायंस प्रेशर को दिखाती है, खासकर तब जब कंपनी कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत है।

कंपनी इस कार्रवाई के विस्तृत फाइनेंशियल और लीगल इम्प्लिकेशन्स का पता लगा रही है कि इसका RCOM और Reliance Telecom की देनदारियों और अनपेड लाइसेंस फीस से जुड़े क्लेम्स पर क्या असर पड़ेगा।

CIRP के बीच एक्शन

Reliance Communications जून 2019 से कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में है, और इसके अफेयर्स को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल मिस्टर अनीश निरंजन नानावाटी मैनेज कर रहे हैं। यह रेगुलेटरी एक्शन इसी इनसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग के तहत हुआ है।

आगे क्या?

RCOM और Reliance Telecom को एन्कैश की गई राशि का हिसाब रखना होगा और संभवतः लाइसेंस फीस डिफॉल्ट के मामले को भी देखना होगा। कंपनी का मैनेजमेंट लीगल और फाइनेंशियल नतीजों का मूल्यांकन कर रहा है, जिसका CIRP में क्लेम्स और देनदारियों पर असर पड़ सकता है।

किन जोखिमों पर रखें नजर?

  • रेगुलेटरी एक्शन: DoT का बकाया ड्यूज पर लगातार प्रेशर।
  • CIRP पर असर: क्लेम्स की वैल्यूएशन और रेजोल्यूशन प्लान पर इस एन्कैशमेंट का क्या प्रभाव पड़ता है।
  • फाइनेंशियल प्रेशर: रेगुलेटर द्वारा और अधिक फाइनेंशियल एडजस्टमेंट या देनदारियों की वसूली की संभावना।

क्या होगा आगे?

निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को RCOM के डिस्क्लोजर्स पर करीबी नजर रखनी चाहिए। कंपनी इन फाइनेंशियल और लीगल इम्प्लिकेशन्स का कैसे आकलन करती है, और DoT या रेजोल्यूशन प्रोफेशनल से CIRP को लेकर क्या और कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.