प्रिफरेंशियल इश्यू में नियमों की अनदेखी
Prime Focus Limited को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से एक एडवाइजरी लेटर मिला है। यह SEBI (ICDR) रेगुलेशंस, 2018 के रेगुलेशन 167(6) के अनुपालन न करने से जुड़ा है। मामला प्रिफरेंशियल इश्यू के तहत हासिल किए गए शेयरों पर अनिवार्य लॉक-इन अवधि समाप्त होने से पहले ही उन्हें बेच देने का है। यह गलती आवंटनकर्ता (allottee), Chartered Finance and Leasing Limited, द्वारा की गई थी, जिसने 22,000 इक्विटी शेयर बेच दिए।
क्या है पूरा मामला?
NSE से मिली इस एडवाइजरी में Prime Focus Limited को SEBI (ICDR) रेगुलेशंस के उल्लंघन के बारे में सूचित किया गया है। कंपनी के अनुसार, Chartered Finance and Leasing Limited, जिसे प्रिफरेंशियल इश्यू में 22,000 शेयर आवंटित किए गए थे, ने 26 जून, 2025 और 17 सितंबर, 2025 के बीच इन शेयरों को बेच दिया। यह बिक्री शेयरों पर लागू अनिवार्य लॉक-इन अवधि के खत्म होने से पहले ही हो गई थी।
इसके अलावा, कंपनी ने यह भी बताया कि उसने अपनी महत्वपूर्ण विदेशी सब्सिडियरी, DNEG S.a.r.l. से संबंधित एक पुराने ऑडिट ऑब्जर्वेशन को दूर करने के लिए 12 नवंबर, 2025 से प्रभावी, श्रीमती शालिनी गोविंद पाई को अपने बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) के रूप में नियुक्त किया है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
NSE की यह एडवाइजरी प्रिफरेंशियल शेयर अलॉटमेंट के आसपास के कड़े रेगुलेटरी माहौल और लॉक-इन अवधि के पालन के महत्व को दर्शाती है। यह निवेशकों के लिए एक रिमाइंडर है कि कंपनी लगातार मजबूत गवर्नेंस सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है, खासकर अपनी विदेशी सब्सिडियरीज़ में। DNEG S.a.r.l. में स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति से जुड़े मुद्दे का समाधान कॉर्पोरेट गवर्नेंस की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
कंपनी की सफाई और आगे के कदम
कंपनी का कहना है कि यह मामला आवंटनकर्ता, Chartered Finance and Leasing Limited, द्वारा अनजाने में की गई ट्रेडिंग की गलती के कारण हुआ। कंपनी के मैनेजमेंट को इस ट्रेड के बारे में जांच होने तक पता नहीं था। इस घटना के बाद, Prime Focus Limited ने अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को और सख्त बना दिया है। अब कंपनी आवंटनकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने के लिए अंडरटेकिंग लेगी कि वे प्रिफरेंशियल इश्यू के शेयरों में इंट्रा-डे ट्रेडिंग नहीं करेंगे। इसका मकसद ऐसी अनजाने में होने वाली गलतियों को दोबारा होने से रोकना है।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
इस मामले में सबसे बड़ा जोखिम प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट और संबंधित लॉक-इन अवधियों के प्रबंधन में प्रक्रियात्मक चूक की संभावना है। हालांकि मैनेजमेंट ने इसे आवंटनकर्ता की एक अनजाने में हुई गलती बताया है और इसे रोकने के लिए कदम उठाए हैं, भविष्य में ऐसी किसी भी घटना से रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को कंपनी की इन मजबूत की गई अनुपालन प्रक्रियाओं के पालन पर नजर रखनी चाहिए।
