Oxford Industries ने भारी नुकसान की भरपाई के लिए अपने शेयर कैपिटल में 99% की कटौती का प्रस्ताव दिया है। कंपनी ने जून 2026 तिमाही में शून्य रेवेन्यू और ₹3.45 लाख का नेट लॉस दर्ज किया है। वहीं, नए प्रमोटर सरोज कुमार चौधरी की 46.46% हिस्सेदारी है।
सिर पर ₹12.95 करोड़ का कर्ज़
Oxford Industries लिमिटेड अपने भारी-भरकम Accumulated Losses यानी जमा हुए घाटे को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी ने अपने शेयर कैपिटल को 99% तक घटाने का प्रस्ताव दिया है। यह कटौती ₹12.95 करोड़ (या ₹1,295.40 लाख) के कुल घाटे को ऑफसेट करने के लिए है।
क्यों उठाया ये कदम?
कंपनी के लिए चिंता की बात यह है कि जून 2026 तिमाही में इसका रेवेन्यू शून्य रहा। यही नहीं, इसी तिमाही में कंपनी को ₹3.45 लाख का नेट लॉस भी हुआ। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने ₹28.08 लाख का मुनाफा कमाया था, जिससे साफ पता चलता है कि कंपनी की हालत कितनी खराब हो चुकी है। मार्च 2026 तक कंपनी पर ₹12.95 करोड़ का Accumulated Loss था, जिसे कम करने के लिए बोर्ड ने 99% कैपिटल रिडक्शन प्लान को मंजूरी दी है। अब यह प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी के लिए 11 सितंबर 2026 को होने वाली AGM (Annual General Meeting) में रखा जाएगा।
क्या हैं संकेत?
यह कदम कंपनी की गंभीर वित्तीय परेशानी और शेयरधारकों के वैल्यू में भारी गिरावट का साफ संकेत देता है। शून्य रेवेन्यू इस बात की ओर इशारा करता है कि कंपनी अपने मुख्य बिजनेस ऑपरेशंस में सक्रिय नहीं है। यह कैपिटल रिडक्शन प्लान बैलेंस शीट को साफ करने और भविष्य में कंपनी के पुनर्गठन या रिवाइवल की राह खोलने का एक प्रयास है।
पिछले कुछ समय से चुनौतियां
Oxford Industries लगातार वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही है, जैसा कि इसके बड़े Accumulated Losses से जाहिर होता है। हालिया वित्तीय नतीजे एक और गिरावट को दर्शाते हैं, जिसमें कोई ऑपरेशनल इनकम नहीं हुई और कंपनी मुनाफे से घाटे में चली गई।
क्या बदलेगा?
अगर शेयरधारक इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो कंपनी का पेड-अप शेयर कैपिटल काफी कम हो जाएगा। यह फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग का एक अहम कदम है।
इस बीच, श्रीमती कट्टाकोटा सत्यवती देवी ने होल-टाइम डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि वह नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर बनी रहेंगी। वहीं, मिस्टर सरोज कुमार चौधरी को नए प्रमोटर के तौर पर मान्यता दी गई है, जिनके पास कंपनी की 46.46% हिस्सेदारी है।
Registered Office को शिफ्ट करने के फैसले को टालना एक मामूली ऑपरेशनल बात है।
जोखिम
कंपनी की व्यवहार्यता (viability) सबसे बड़ा जोखिम है, खासकर शून्य रेवेन्यू और भारी घाटे को देखते हुए। कैपिटल रिडक्शन प्लान की सफलता शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करती है। भविष्य में कंपनी कैसा प्रदर्शन करेगी, यह कहना मुश्किल है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को 11 सितंबर 2026 को होने वाली AGM के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, खासकर कैपिटल रिडक्शन प्रस्ताव के संबंध में। रीस्ट्रक्चरिंग के बाद कंपनी की भविष्य की ऑपरेशनल स्ट्रेटेजी और वित्तीय प्रदर्शन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
