Ovobel Foods ने CRISIL से अपनी क्रेडिट रेटिंग वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि रेटिंग एजेंसी के मूल्यांकन से उनका गंभीर मतभेद है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी ने Q4FY2026 में मजबूत मुनाफा दर्ज किया है।
CRISIL रेटिंग पर Ovobel Foods का बड़ा कदम!
Ovobel Foods ने हाल ही में अपने Q4FY2026 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का रेवेन्यू ₹65.02 करोड़ और नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹14.19 करोड़ रहा। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए कंपनी का रेवेन्यू ₹191.75 करोड़ और PAT ₹9.06 करोड़ दर्ज किया गया।
रेटिंग वापस क्यों ले रही है कंपनी?
CRISIL रेटिंग्स ने Ovobel Foods की रेटिंग को 'CRISIL BB/Stable / CRISIL A4+ (Issuer Not Cooperating)' में बदल दिया था, जिसके तहत कुल ₹29.9 करोड़ की सुविधाओं को रेट किया गया था। लेकिन Ovobel Foods इस फैसले से नाखुश है और रेटिंग वापस लेने की अर्जी दे रही है। कंपनी का मानना है कि रेटिंग एजेंसी ने उनके मौजूदा फाइनेंशियल परफॉर्मेंस को ठीक से नहीं समझा, जिसका सीधा असर उनके उधार लेने की लागत (Borrowing Costs) पर पड़ता है।
'Issuer Not Cooperating' टैग का मतलब
'Issuer Not Cooperating' का टैग एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इसका मतलब है कि CRISIL को कंपनी से जरूरी जानकारी, जिसमें 'No Default Statements' भी शामिल हैं, नहीं मिल पाई। इससे कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ की निगरानी में दिक्कतें आती हैं। भले ही Ovobel Foods ने Q4FY2026 में ₹14.19 करोड़ का दमदार मुनाफा दिखाया हो, लेकिन इस टैग से भविष्य में लोन मिलने में परेशानी हो सकती है और क्रेडिट रिस्क बढ़ सकता है।
मुनाफे में बड़ा उछाल, पर पारदर्शिता पर सवाल
Ovobel Foods के नेट प्रॉफिट मार्जिन में Q4FY2026 में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जो 21.82% तक पहुंच गया, जबकि FY2025 में यह सिर्फ 4.72% था। यह हालिया तिमाही में बेहतर मुनाफे का संकेत देता है।
आगे क्या होगा?
कंपनी अपनी क्रेडिट रेटिंग को वापस लेने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इससे ₹29.9 करोड़ की सुविधाओं से जुड़ी CRISIL रेटिंग हट जाएगी। निवेशकों को कंपनी की भविष्य की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के साथ उसके संबंधों पर नजर रखनी होगी।
मुख्य जोखिम
सबसे बड़ा जोखिम 'Issuer Not Cooperating' स्टेटस से जुड़ा है, जो मैनेजमेंट और डेटा की उपलब्धता में कमी को दर्शाता है। इससे कंपनी की असली क्रेडिट हेल्थ को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है और उधार लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
