सरकारी कंपनी MMTC ने BSE को जानकारी दी है कि वह SEBI के नियमों का पालन करने में विफल रही है। कंपनी के बोर्ड में फिलहाल एक भी इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Independent Director) नहीं है, जिसके कारण ऑडिट और नॉमिनेशन जैसी जरूरी कमेटियां नहीं बन पा रही हैं।
गवर्नेंस में बड़ा संकट
MMTC Limited ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया है कि वह SEBI (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के कई प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है। कंपनी ने रेगुलेशन 17(1), 18(1), 19(1), 20(2) और 21(2) के तहत नियमों को पूरा नहीं किया है। असल में, बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कुल संख्या शून्य है, जो कि किसी भी लिस्टेड पब्लिक कंपनी के लिए अनिवार्य है।
क्यों है यह गंभीर मामला?
इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की गैर-मौजूदगी के कारण कंपनी अपनी महत्वपूर्ण कमेटियों, जैसे कि ऑडिट कमेटी और नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी का गठन नहीं कर पा रही है। ये कमेटियां फाइनेंशियल पारदर्शिता और मैनेजमेंट की जवाबदेही तय करने के लिए बेहद जरूरी होती हैं। इनके न होने से कंपनी के गवर्नेंस स्ट्रक्चर में बड़ा गैप आ गया है, जिसके चलते एक्सचेंज की तरफ से पेनाल्टी और कड़ी कार्रवाई का डर बना हुआ है।
मैनेजमेंट का क्या है कहना?
कंपनी ने अपनी सफाई में कहा है कि वह भारत सरकार का उपक्रम है और मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अधीन आती है। ऐसे में डायरेक्टर्स की नियुक्ति का अधिकार पूरी तरह से मंत्रालय के पास है। MMTC का कहना है कि वे लगातार डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स को इन जरूरी नियुक्तियों के लिए रिमाइंड करा रहे हैं, ताकि नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
शेयरधारकों को अब सरकार के अगले कदम पर नजर रखनी होगी। जब तक नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति नहीं होती, तब तक कंपनी के कॉर्पोरेट फैसलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहेंगे। निवेशकों को किसी भी सरकारी घोषणा का इंतजार करना चाहिए जो बोर्ड की संरचना को फिर से पटरी पर ला सके।
