Liberty Shoes को प्रमोटर रीक्लासिफिकेशन के मामले में SEBI से जरूरी स्पष्टीकरण मिला है। हालांकि, जुलाई **2026** की एडमिनिस्ट्रेटिव वॉर्निंग अभी भी बरकरार है और कंपनी को आगे बढ़ने के लिए NSE और BSE से NOC का इंतजार है।
क्या है पूरा मामला?
Liberty Shoes ने अपने प्रमोटर अर्पण गुप्ता (व्यक्तिगत और HUF के कर्ता के रूप में) को 'प्रमोटर' कैटेगरी से हटाकर 'पब्लिक' कैटेगरी में शिफ्ट करने की अर्जी दी थी। इस पर 7 अक्टूबर 2026 को SEBI ने एक औपचारिक पत्र जारी कर रेगुलेटरी रास्ता साफ किया है। ध्यान रहे कि 21 जुलाई 2026 को कंपनी को नॉन-कम्प्लायंस को लेकर एक प्रशासनिक चेतावनी (Administrative Warning) मिली थी, जो अभी भी प्रभावी है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
SEBI ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल प्रमोटर्स की पात्रता (Eligibility) पर कोई राय नहीं दे रहा है। अंतिम फैसला NSE, BSE और कंपनी के शेयरहोल्डर्स को लेना है। हालांकि, कंपनी पर रेगुलेटरी नजर लगातार बनी हुई है।
अब आगे क्या?
कंपनी ने पहले ही NSE और BSE में 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) के लिए आवेदन कर दिया है। जैसे ही एक्सचेंज अपना रुख स्पष्ट करेंगे, मामला शेयरहोल्डर्स और बोर्ड के सामने रखा जाएगा।
रिस्क फैक्टर
सबसे बड़ी चुनौती जुलाई 2026 की वह पेंडिंग वॉर्निंग है, जिसका समाधान होना अभी बाकी है। यदि रेगुलेटरी मोर्चे पर कोई और समस्या आती है, तो यह प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। साथ ही, शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिलना भी इस पूरे ट्रांजिशन की सफलता के लिए अनिवार्य है।
