Landsmill Green के प्रमोटर, लखमेंद्र खुराना, ने **5 करोड़** शेयर गिफ्ट किए हैं, जिनकी कीमत **₹4.2 करोड़** है। यह ट्रांसफर प्रमोटर ग्रुप के भीतर हुआ है, जिससे कुल प्रमोटर होल्डिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन सीधे स्वामित्व में बदलाव आया है।
प्रमोटर की शेयर होल्डिंग में बदलाव
Landsmill Green के प्रमोटर लखमेंद्र खुराना ने 19 जून, 2026 को 5,00,00,000 इक्विटी शेयर गिफ्ट के तौर पर ट्रांसफर किए हैं। इस ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू ₹4.2 करोड़ है।
क्या हुआ है?
Landsmill Green Limited ने प्रमोटर शेयरहोल्डिंग में हुए बदलाव का खुलासा किया है। प्रमोटर और डायरेक्टर लखमेंद्र खुराना ने 5,00,00,000 इक्विटी शेयरों का इंटर-से ट्रांसफर (आपस में ट्रांसफर) गिफ्ट के जरिए किया। यह ट्रांजैक्शन 19 जून, 2026 को हुआ और इसका मूल्य ₹4.2 करोड़ आँका गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना प्रमोटर ग्रुप के भीतर एक आंतरिक पुनर्गठन है। इंटर-से गिफ्ट ट्रांसफर का मतलब है कि शेयर प्रमोटर ग्रुप के भीतर ही एक व्यक्ति या एंटिटी से दूसरी को दिए गए हैं। ऐसा अक्सर एस्टेट प्लानिंग या पारिवारिक शेयरहोल्डिंग को व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे ट्रांसफर से कंपनी में प्रमोटर की कुल हिस्सेदारी कम नहीं होती है, और न ही यह स्टॉक की मार्केट लिक्विडिटी को प्रभावित करता है क्योंकि यह ओपन मार्केट में बिक्री नहीं है।
पिछली जानकारी
इससे पहले, प्रमोटर लखमेंद्र खुराना के पास कंपनी की 10.33% इक्विटी के बराबर 14,57,91,451 शेयर थे। इस गिफ्ट ट्रांसफर के बाद, उनके सीधे स्वामित्व वाले शेयरों की संख्या घटकर 9,57,91,451 रह गई है। यह SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत आवश्यक नियमित डिस्क्लोजर का हिस्सा है।
अब क्या बदला है?
मुख्य बदलाव लखमेंद्र खुराना के सीधे शेयर स्वामित्व में आया है। हालांकि, इस विशेष गिफ्ट ट्रांजैक्शन से प्रमोटर ग्रुप की कुल शेयरहोल्डिंग प्रतिशत और कंपनी पर उनका नियंत्रण अपरिवर्तित रहेगा।
निवेशकों के लिए क्या है?
निवेशकों के लिए, यह प्रमोटर परिवार या एंटिटीज के भीतर शेयरहोल्डिंग के पुनर्गठन को दर्शाता है। इसे आमतौर पर तटस्थ रूप से देखा जाता है, क्योंकि यह प्रमोटर की Landsmill Green में प्रतिबद्धता या विश्वास में कमी का संकेत नहीं देता है। शेयरधारकों को इसे कंपनी की स्वामित्व संरचना में एक बड़े बदलाव के बजाय एक स्ट्रक्चरल एडजस्टमेंट के रूप में देखना चाहिए।
