Lakshmi Precision Screws का बुरा हाल: क्रेडिटर ने दी लिक्विडेशन (Liquidation) को मंजूरी, NCLT पर टिकी निगाहें

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Lakshmi Precision Screws का बुरा हाल: क्रेडिटर ने दी लिक्विडेशन (Liquidation) को मंजूरी, NCLT पर टिकी निगाहें

Lakshmi Precision Screws Ltd अब लिक्विडेशन (Liquidation) की ओर बढ़ रही है। कंपनी के क्रेडिटर (Creditors) ने इस प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से फैसले का इंतजार है। कंपनी पर गवर्नेंस (Governance) से जुड़ी दिक्कतें और रेगुलेटरी नॉन-कंप्लायंस (Regulatory Non-compliance) के आरोप हैं।

Lakshmi Precision Screws के बुरे दिन, लिक्विडेशन की ओर

Lakshmi Precision Screws Ltd अब आधिकारिक तौर पर लिक्विडेशन (Liquidation) की प्रक्रिया की ओर बढ़ रही है। कंपनी के क्रेडिटर कमेटी (Committee of Creditors - CoC) ने इस कदम को मंजूरी दे दी है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) चंडीगढ़ बेंच में इस बाबत अर्ज़ी दाखिल की गई है, जिसका फैसला आना बाकी है।

क्या हुआ?

यह कंपनी 18 जुलाई, 2018 से इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुज़र रही है। क्रेडिटर कमेटी की मंजूरी यह बताती है कि अब कंपनी को बचाने की कोशिशें नाकाम रही हैं और लिक्विडेशन ही एकमात्र रास्ता बचा है। NCLT ने 18 जुलाई, 2018 को CIRP शुरू करने का आदेश दिया था।

यह क्यों मायने रखता है?

यह डेवलपमेंट कंपनी की गहरी वित्तीय तंगी की पुष्टि करता है। जब क्रेडिटर लिक्विडेशन के लिए सहमत हो जाते हैं, तो अब सारा ध्यान NCLT के अंतिम फैसले पर होता है। निवेशकों को कंपनी के अंदर चल रहे गवर्नेंस के मुद्दों और रेगुलेटरी नॉन-कंप्लायंस पर ध्यान देना चाहिए।

पूरी कहानी

Lakshmi Precision Screws जुलाई 2018 से CIRP के अधीन है। IBC कोड के तहत, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) की शक्तियां निलंबित कर दी जाती हैं और एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) कंपनी का कामकाज संभालता है।

अब क्या बदलेगा?

मंजूर किए गए लिक्विडेशन का मतलब है कि कंपनी की प्रॉपर्टीज़ (Assets) को बेचकर क्रेडिटर का पैसा चुकाया जाएगा। NCLT का अंतिम आदेश इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देगा। रेजोल्यूशन प्रोफेशनल, दीपक थुकराल, इस प्रक्रिया को संभालना जारी रखेंगे।

जोखिम क्या हैं?

कंपनी के अंदरूनी गवर्नेंस को लेकर गंभीर मतभेद हैं। RP ने कंपनी के डायरेक्टर्स के खिलाफ सहयोग न करने की शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा, CIRP की वजह से ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते कंपनी जरूरी SEBI डिस्क्लोजर (SEBI disclosures) सबमिट करने में भी नाकाम रही है।

पीयर कम्पेरिज़न (Peer Comparison)

जो कंपनियां CIRP से गुज़रती हैं, उनकी वैल्यू उनके स्टेबल ऑपरेशंस वाले साथियों की तुलना में काफी कम हो जाती है। बाज़ार ऐसे दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान अनिश्चितता और वैल्यू के नुकसान को पहले ही प्राइस कर लेता है।

मुख्य आंकड़े

कंपनी 18 जुलाई, 2018 से पांच साल से अधिक समय से CIRP में है।

आगे क्या देखना है?

निवेशकों को लिक्विडेशन अर्ज़ी पर NCLT के फैसले और प्रॉपर्टीज़ की बिक्री व क्रेडिटर को भुगतान से जुड़ी किसी भी नई जानकारी पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए।

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