SEBI ने LS Industries लिमिटेड पर लगे प्राइस मैनिपुलेशन के आरोपों को खारिज कर दिया है, लेकिन BSE में कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग अभी भी सस्पेंडेड है। निवेशकों के लिए राहत नहीं है क्योंकि कंपनी अब भी लिस्टिंग नियमों के उल्लंघन और जांच में सहयोग न करने जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
हेरफेर के आरोपों से मिली राहत, पर मुश्किलें कायम
SEBI ने फरवरी और मई 2025 में जारी किए गए अपने उन अंतरिम और पुष्ट आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनमें LS Industries पर स्टॉक की कीमतों और वॉल्यूम के साथ हेरफेर (Manipulation) के आरोप लगाए गए थे। जांच के बाद नियामक ने माना कि कंपनी के खिलाफ मैनिपुलेशन के आरोप साबित नहीं हो सके।
क्यों नहीं खुला सस्पेंशन?
आरोप हटने के बावजूद निवेशकों को कोई राहत नहीं मिली है। 8 दिसंबर, 2025 से लागू BSE ट्रेडिंग सस्पेंशन अभी भी जारी है। SEBI ने साफ कर दिया है कि उसके ताजा आदेश से ट्रेडिंग सस्पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बल्कि, नियामक ने BSE को यह अधिकार दिया है कि वह नियमों के तहत कंपनी के शेयरों को डीलिस्ट करने की प्रक्रिया जारी रख सकता है।
क्या है बड़ी चिंता?
जांच में हेरफेर के आरोप तो हट गए, लेकिन कंपनी गवर्नेंस और नियमों के पालन में बुरी तरह विफल रही है। कंपनी SEBI (Listing Obligations and Disclosures Requirements) रेगुलेशन्स, 2015 का पालन करने में नाकाम रही है। इसके अलावा, कंपनी ने SEBI के समन (Summons) का भी जवाब नहीं दिया है। इन उल्लंघनों की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दे दी गई है।
पुरानी कमियां बनीं गले की फांस
BSE द्वारा 2024 और 2025 में की गई साइट विजिट्स में जो खुलासे हुए, वे आज भी कंपनी के लिए मुसीबत बने हुए हैं। निरीक्षण में पाया गया कि कंपनी के पास न तो कोई फंक्शनल टेक्सटाइल बिजनेस था, न ही कोई मशीनरी, कच्चा माल या पर्याप्त स्टाफ। ये तमाम कमियां ही स्टॉक के सस्पेंशन की मुख्य वजह बनी थीं।
निवेशकों के लिए जोखिम
शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ा खतरा अब स्टॉक के डीलिस्ट होने का है। बिना किसी ठोस कामकाज और भारी रेगुलेटरी उल्लंघन के चलते कंपनी का भविष्य अंधकारमय है। निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि मैनिपुलेशन के आरोप हटने का मतलब कंपनी के कामकाज का सही होना नहीं है।
