Jyoti Ltd की एक बड़ी कोशिश नाकाम रही है। BSE ने कंपनी के **59,63,636** इक्विटी शेयरों को लिस्ट करने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला साल **2018** के शेयर अलॉटमेंट विवाद से जुड़ा है, जिसे लेकर कंपनी को बार-बार रेगुलेटरी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है मामला?
शेयर बाजार नियामक और BSE के साथ Jyoti Ltd का पुराना विवाद फिर सुर्खियों में है। एक्सचेंज ने 12 अक्टूबर, 2026 को जारी अपने ऑर्डर में कंपनी की नई लिस्टिंग अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है। यह लगातार दूसरी बार है जब कंपनी इन शेयरों को ट्रेड करने की अनुमति पाने में विफल रही है।
पुरानी कानूनी लड़ाई का इतिहास
यह विवाद 2 मई, 2018 से शुरू हुआ था, जब कंपनी ने Rare Asset Reconstruction Ltd को 59,63,636 शेयर जारी किए थे। BSE ने इसे पहले ही इस आधार पर लिस्ट करने से मना कर दिया था कि अलॉटमेंट के समय जरूरी शेयरहोल्डर अप्रूवल नहीं लिया गया था। मामला Securities Appellate Tribunal (SAT) तक पहुंचा, जहां कंपनी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद Supreme Court of India में भी कंपनी की याचिका खारिज हो गई थी।
क्या बदला है?
कंपनी ने अपनी गलती सुधारने के लिए मई 2025 में पोस्टल बैलेट के जरिए शेयरहोल्डर्स से रैटिफिकेशन (ratification) लिया था। इसी मंजूरी के आधार पर 31 मई, 2026 को कंपनी ने फिर से लिस्टिंग के लिए आवेदन किया था। हालांकि, BSE ने पुराने नियमों और अनुपालन संबंधी चिंताओं को बरकरार रखते हुए फिर से इसे ठुकरा दिया है।
फिलहाल, कंपनी का कहना है कि इस ऑर्डर से सीधे तौर पर फाइनेंशियल नुकसान नहीं है, लेकिन वे आगे की कानूनी और रेगुलेटरी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि जब तक यह डेडलॉक खत्म नहीं होता, तब तक इन शेयरों की लिक्विडिटी पर तलवार लटकी रहेगी।
