IRCTC पर BSE और NSE ने नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया है। बोर्ड कंपोजिशन और AGM समय सीमा में देरी के कारण कंपनी को कुल **₹21 लाख** का हर्जाना देना होगा, जिसे माफ करने के लिए मैनेजमेंट ने गुहार लगाई है।
जुर्माने की बड़ी वजहें
नियामक नियमों (SEBI LODR) का पालन न करने पर IRCTC पर गाज गिरी है। स्टॉक एक्सचेंज ने दो मुख्य आधारों पर यह जुर्माना लगाया है:
- बोर्ड कंपोजिशन (Board Composition): 30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए बोर्ड के ढांचे में नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके लिए प्रति एक्सचेंज ₹10.23 लाख का जुर्माना लगा है।
- AGM में देरी: कंपनी अपनी 27वीं AGM को 31 अगस्त 2026 की डेडलाइन तक आयोजित नहीं कर सकी, जिसके लिए प्रति एक्सचेंज ₹29,500 का जुर्माना लगाया गया है।
गवर्नेंस की चुनौतियां
भले ही कंपनी के लिए यह जुर्माना बहुत बड़ी रकम न हो, लेकिन यह गवर्नेंस की कमियों को उजागर करता है। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और महिला इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति में कमी सीधे तौर पर रेल मंत्रालय पर निर्भरता को दिखाती है। वहीं, AGM में देरी के लिए कंपनी ने C&AG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया) से समय पर फीडबैक न मिलने को जिम्मेदार ठहराया है।
अब आगे क्या?
कंपनी ने इन पेनल्टी को माफ कराने के लिए BSE और NSE को औपचारिक आवेदन दिया है। मैनेजमेंट का तर्क है कि देरी के पीछे की वजहें प्रशासनिक थीं जो उनके नियंत्रण से बाहर थीं। कंपनी ने अंततः 29 सितंबर 2026 को अपनी AGM पूरी कर ली थी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या स्टॉक एक्सचेंज इस माफी की याचिका को स्वीकार करते हैं या नहीं।
