Hitech Corporation ने बताई डीलिस्टिंग की कीमत
Hitech Corporation Limited ने अपनी वॉलंटरी डीलिस्टिंग प्रक्रिया के लिए फ्लोर प्राइस ₹252 प्रति शेयर तय करने की घोषणा की है। SEBI (Delisting of Equity Shares) Regulations, 2021 के तहत, यह सबसे ज़्यादा लागू होने वाली कीमत है। कंपनी ने ₹353 प्रति शेयर का एक इंडिकेटिव ऑफर प्राइस भी तय किया है, जो फ्लोर प्राइस से काफी ज़्यादा है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम?
यह घोषणा शेयरधारकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डीलिस्टिंग के लिए न्यूनतम कीमत तय करती है और एक खास ऑफर प्राइस भी बताती है, जो रेगुलेटरी फ्लोर से काफी प्रीमियम पर है। यह कंपनी के पब्लिक शेयरधारकों के लिए प्रीमियम पर बाहर निकलने का एक रास्ता भी खोलता है।
डीलिस्टिंग की पृष्ठभूमि
यह डीलिस्टिंग SEBI के नियमों के तहत की जा रही है। कंपनी की कुल संपत्ति ₹488.84 करोड़ बताई गई है, जबकि एडजस्टेड बुक वैल्यू (Adjusted Book Value) ₹432.81 करोड़ है। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 74.43% है, और पब्लिक की हिस्सेदारी 25.57% है।
आगे क्या होगा?
कंपनी ने डीलिस्टिंग के लिए औपचारिक कदम उठाए हैं, जिसमें M/s. Robert Pavrey & Associates LLP को पीयर रिव्यूअर (Peer Reviewer) नियुक्त करना शामिल है, जो ज़रूरी ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) और ऑडिट करेंगे। शेयरधारकों को जल्द ही ऑफर लेटर (Offer Letter) मिलेगा जिसमें प्रक्रिया और शर्तों का ब्यौरा होगा।
वैल्यूएशन में जोखिम
यह ध्यान देने योग्य है कि प्रॉपर्टी वैल्यू और निवेशों के कैरिंग वैल्यू (Carrying Value) जैसे वैल्यूएशन अनुमान तीसरे पक्ष की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और सरकारी दरों के मुकाबले स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं। यह शेयरधारकों के लिए उच्च वैल्यूएशन की मांग का एक मुद्दा हो सकता है।
पीयर तुलना
आमतौर पर, डीलिस्टिंग के ऑफर प्राइस को शेयरधारकों की मंजूरी के लिए हाल के बाजार भाव और बुक वैल्यू पर प्रीमियम देने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। Hitech Corporation का ऑफर प्राइस ₹353, इसके 60-दिन के VWAP (Volume-Weighted Average Market Price) ₹148.82 से काफी ज़्यादा है।
खास आंकड़े
फ्लोर प्राइस ₹252 को एडजस्टेड बुक वैल्यू से निकाला गया है। 23 फरवरी 2026 से 25 मई 2026 तक NSE पर 60-दिन का VWAP ₹148.82 प्रति शेयर था। वैल्यूएशन के लिए 31 मार्च 2026 तक की ऑडिटेड कंसॉलिडेटेड बैलेंस शीट का इस्तेमाल किया गया है।
अगली बड़ी खबर
निवेशकों को औपचारिक ऑफर लेटर, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स कमेटी की सिफारिशों और डीलिस्टिंग प्रक्रिया के अंतिम नतीजों पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए।
