Goa Carbon Ltd ने 1994-95 असेसमेंट ईयर (AY) से जुड़े इनकम टैक्स विवाद को सुलझा लिया है। कंपनी को **₹0.62 करोड़** का टैक्स रिफंड मिला है। कंपनी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर अपनी रिट पिटीशन वापस ले ली है, क्योंकि इनकम टैक्स विभाग ने ब्याज की गलत वसूली को ठीक कर दिया है।
गोवा कार्बन को मिला ₹0.62 करोड़ का टैक्स रिफंड
Goa Carbon Ltd के निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर आई है। कंपनी ने 1994-95 असेसमेंट ईयर (AY) के एक पुराने इनकम टैक्स डिस्प्यूट को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। इस विवाद के निपटारे के बाद कंपनी को ₹0.62 करोड़ (₹61.61 लाख) का टैक्स रिफंड मिलेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला इनकम टैक्स के असेसमेंट ईयर 1994-95 से जुड़ा है। कंपनी ने 2012 में एक रेक्टिफिकेशन एप्लीकेशन (Rectification Application) फाइल की थी। दरअसल, 2011 के एक पुराने ऑर्डर में सेक्शन 234D के तहत ब्याज को गलत तरीके से लगाया गया था। इस गलती को ठीक करने के लिए कंपनी ने यह एप्लीकेशन दी थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट में क्यों गई थी कंपनी?
जब इनकम टैक्स विभाग ने कंपनी की रेक्टिफिकेशन एप्लीकेशन पर समय पर कार्रवाई नहीं की, तो Goa Carbon Ltd को बॉम्बे हाई कोर्ट, गोवा बेंच में एक रिट पिटीशन (Writ Petition) दायर करनी पड़ी।
अब क्या होगा?
6 जुलाई 2026 को डिप्टी कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स ने एक रेक्टिफिकेशन ऑर्डर जारी किया, जिसमें गलती को सुधारा गया। इसके बाद, 13 जुलाई 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंपनी की रिट पिटीशन को वापस लेने की मंजूरी दे दी। अब कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई है और कंपनी रिफंड की राशि प्राप्त करने की अंतिम औपचारिकताएं पूरी कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
हालांकि यह रिफंड कंपनी के लिए एक वन-टाइम इनफ्लो (One-time inflow) है और इससे कंपनी के ऑपरेशंस में कोई सीधा सुधार नहीं होगा, लेकिन यह एक पुराने टैक्स अनिश्चितता (Tax uncertainty) को खत्म करता है। इससे कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड्स भी साफ होंगे। यह डिस्प्यूट करीब 30 साल पुराना था, जिसका निपटारा अब हुआ है।
