अब क्या हुआ?
शेयर बाजार के रेगुलेटर BSE और NSE ने Cochin Shipyard Limited पर कुल ₹19.11 लाख (GST सहित) का भारी जुर्माना लगाया है। कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए तिमाही के लिए SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) रेगुलेशंस का पालन नहीं किया।
किस बात का है चक्कर?
यह जुर्माना खासतौर पर कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और उनकी कमेटियों के गठन से जुड़ा है। कंपनी ने न तो ज़रूरी संख्या में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को नियुक्त किया है और न ही ऑडिट कमेटी और नॉमिनेशन एवं रेमुनरेशन कमेटी का सही से गठन किया है।
कंपनी की सफाई?
Cochin Shipyard का कहना है कि यह समस्या उनके सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज (CPSE) होने की वजह से है। कंपनी के मुताबिक, डायरेक्टर्स की नियुक्ति सीधे भारत सरकार द्वारा की जाती है, और इसी प्रक्रिया के चलते वे रेगुलेटरी नियमों का पालन नहीं कर पाए। कंपनी ने इस मामले में सरकार से ज़रूरी डायरेक्टर्स नियुक्त करने के लिए गुजारिश की है।
आगे क्या?
कंपनी अब सरकार से होने वाली डायरेक्टर्स की नियुक्ति का इंतज़ार कर रही है। नियुक्ति होते ही, Cochin Shipyard अपनी ऑडिट कमेटी और नॉमिनेशन एवं रेमुनरेशन कमेटी का पुनर्गठन करेगा ताकि वे SEBI के नियमों के अनुसार काम कर सकें। साथ ही, कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों से लगाए गए जुर्माने में छूट देने की भी अपील की है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी?
निवेशकों को सरकार द्वारा डायरेक्टर्स की नियुक्ति में लगने वाले समय पर नज़र रखनी चाहिए। अगर इसमें ज़्यादा देरी होती है, तो कंपनी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, क्या कंपनी को जुर्माने से छूट मिलती है या नहीं, इस पर भी ध्यान देना ज़रूरी होगा।
