Cochin Shipyard को BSE और NSE की ओर से कुल **₹19.32 लाख** का जुर्माना भरना पड़ा है। यह कार्रवाई जून **2026** तिमाही के दौरान इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या में कमी के कारण हुई है। हालांकि, अब बोर्ड पूरी तरह नियम के दायरे में है और कंपनी जुर्माने के लिए माफी (Waiver) की मांग करेगी।
गवर्नेंस में चूक का मामला
Cochin Shipyard Limited (CSL) को रेगुलेटरी नियमों की अनदेखी भारी पड़ गई है। BSE और NSE दोनों ने ₹9.66 लाख प्रति एक्सचेंज का जुर्माना लगाया है, यानी कुल ₹19.32 लाख की चपत। एक्सचेंज का कहना है कि जून 2026 की तिमाही में कंपनी के बोर्ड में जरूरी इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या कम थी, जिसका असर ऑडिट और रिमुनरेशन कमेटी की संरचना पर भी पड़ा।
कंपनी का क्या है तर्क?
एक सरकारी कंपनी होने के नाते, CSL ने सफाई दी है कि डायरेक्टर्स की नियुक्ति उसके हाथ में नहीं होती, यह काम भारत सरकार (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) का है। कंपनी लगातार मंत्रालय के संपर्क में थी ताकि इन खाली पदों को भरा जा सके। अब 17 अगस्त 2026 को डॉ. वाणी अहलूवालिया की नियुक्ति के बाद बोर्ड पूरी तरह से SEBI LODR नियमों के अनुकूल हो गया है।
अब आगे क्या होगा?
कंपनी ने अब ऑडिट और नॉमिनेशन कमेटी का पुनर्गठन कर लिया है और एक्सचेंज से इस जुर्माने को माफ करने की अपील करने वाली है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या एक्सचेंज सरकार की नियुक्तियों में हुई देरी को आधार मानते हुए जुर्माना माफ करते हैं या नहीं।
