सरकार की बड़ी बिकवाली!
राष्ट्रपति (जो कोयला मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते हैं) ने Coal India Limited के 12,32,79,566 इक्विटी शेयर बेच दिए हैं। NSE और BSE पर 'Offer for Sale - On Market' के ज़रिए हुई इस डील से सरकार को करीब ₹5,549 करोड़ मिले हैं। यह सौदा 27 मई से 29 मई, 2026 के बीच पूरा हुआ।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इस बिकवाली के बाद Coal India में प्रमोटर (सरकार) की हिस्सेदारी 63.13% से घटकर 61.13% रह गई है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी के ज़्यादा शेयर अब पब्लिक यानी आम निवेशकों के हाथों में होंगे, जिससे स्टॉक की लिक्विडिटी (liquidity) बढ़ सकती है। यह कदम सरकार की अपनी हिस्सेदारी कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
सरकारी PSU का बैकग्राउंड
Coal India एक सरकारी कोयला खनन और उत्पादक कंपनी है, जिसमें राष्ट्रपति (भारत सरकार) सबसे बड़े प्रमोटर हैं। सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाना और फंड जुटाना सरकार की एक पुरानी रणनीति रही है।
क्या बदलेगा अब?
प्रमोटर की हिस्सेदारी तो कम हो गई है, लेकिन कंपनी के कामकाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, शेयरहोल्डिंग पैटर्न (shareholding pattern) में बदलाव ज़रूर आया है, यानी अब शेयर ज़्यादा लोगों के पास होंगे।
क्या हैं जोखिम?
बाज़ार को इन अतिरिक्त शेयरों को सोखने में थोड़ी दिक्कत आ सकती है, जिससे आने वाले समय में स्टॉक में थोड़ी अस्थिरता (volatility) देखने को मिल सकती है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि बाज़ार इन अतिरिक्त शेयरों को कैसे लेता है और भविष्य में सरकार की ओर से हिस्सेदारी बेचने की और क्या योजनाएं हैं।
