Austere Systems को SEBI की ओर से एक फॉर्मल चेतावनी मिली है। कंपनी पर आरोप है कि उसने NCLAT के एक आदेश के बारे में शेयर बाजार को समय पर जानकारी नहीं दी, जो **₹44.26 लाख** की पेनल्टी से जुड़ा था। हालांकि कंपनी का कहना है कि यह लायबिलिटी पहले से ही डिस्क्लोज थी, लेकिन रेगुलेटर ने इसे नियमों का उल्लंघन माना है।
क्या है पूरा मामला?
रेगुलेटरी अथॉरिटी SEBI ने Austere Systems Limited को एक चेतावनी-सह-सलाह पत्र जारी किया है। यह मामला 23 सितंबर, 2025 के एक NCLAT आदेश से जुड़ा है, जिसमें अप्रैल 2022 में Competition Commission of India (CCI) द्वारा लगाई गई पेनल्टी को बरकरार रखा गया था। कंपनी ने इसे अपने मई 2026 के फाइनेंशियल नतीजों में शामिल तो किया था, लेकिन SEBI के नियमों (Regulation 30) के तहत स्टॉक एक्सचेंज को अलग से सूचना देना अनिवार्य था, जिसे कंपनी ने नहीं किया।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
भले ही इस मामले का सीधा फाइनेंशियल इम्पैक्ट लगभग ₹44.26 लाख तक सीमित है, लेकिन SEBI की तरफ से आई यह चेतावनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस और इंटरनल कंट्रोल सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। कंपनी ने सफाई दी है कि इस पेनल्टी का जिक्र उनके Red Herring Prospectus में पहले ही किया जा चुका था।
आगे क्या होगा?
यह विवाद 2022 में सॉयल-टेस्टिंग टेंडर्स से जुड़ा है। कंपनी ने इसके खिलाफ 12 दिसंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जो अभी भी लंबित है। कंपनी मैनेजमेंट ने माना है कि डिस्क्लोजर प्रोटोकॉल को समझने में चूक हुई थी, जिसके बाद उन्होंने अपने इंटरनल कंप्लायंस और एस्केलेशन प्रोटोकॉल को काफी सख्त कर दिया है। निवेशकों को अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई (Diary No. 62482/2025) पर नजर रखनी चाहिए।
