सरकारी कंपनी Andrew Yule & Company पर BSE ने **₹5.37 लाख** का जुर्माना लगाया है। SEBI के बोर्ड कंपोजिशन नियमों का पालन न करने पर यह कार्रवाई हुई है। कंपनी ने अब इस जुर्माने को माफ करने की गुहार लगाई है।
जुर्माना क्यों लगा?
BSE ने 25 मई, 2026 को जारी नोटिस में ₹5,36,900 का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। यह पेनल्टी 30 जून, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए SEBI (LODR) रेगुलेशन 17(1) के उल्लंघन के कारण लगाई गई है। इस नियम के तहत कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की एक निश्चित संख्या होना अनिवार्य है, जिसे कंपनी पूरा करने में विफल रही।
सरकारी कंपनी की क्या है मजबूरी?
रिटेल निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह मामला एक CPSE (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज) के गवर्नेंस स्ट्रक्चर से जुड़ा है। इन कंपनियों में निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार सीधे भारत सरकार के 'मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज' के पास होता है।
कंपनी का पक्ष
कंपनी मैनेजमेंट ने BSE के पास फॉर्मल अपील दायर कर जुर्माने को माफ करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि यह देरी केवल प्रक्रियात्मक है, क्योंकि निदेशकों की नियुक्ति का कंट्रोल सरकार के हाथ में है। कंपनी ने मंत्रालय को सूचित कर दिया है ताकि जल्द से जल्द खाली पड़े पदों को भरा जा सके और SEBI के मानकों का पालन किया जा सके।
आगे क्या रखें ध्यान?
निवेशकों को अब कंपनी की ओर से जुर्माने की माफी पर आने वाले फैसले और स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति पर नजर रखनी चाहिए। अगर बोर्ड की संरचना जल्द ठीक नहीं होती है, तो कंपनी पर भविष्य में और भी रेगुलेटरी दबाव बढ़ सकता है।
