Aksh Optifibre Limited को NCLT जयपुर बेंच ने दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) में स्वीकार कर लिया है। कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण अब एक अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) को सौंप दिया गया है।
NCLT ने Aksh Optifibre को CIRP में डाला
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), जयपुर बेंच ने 19 जून 2026 को Aksh Optifibre Limited के खिलाफ दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) के लिए दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है। यह फैसला पहले के मतभेदों के बाद आया, जिसमें तकनीकी सदस्य की राय को बहुमत माना गया।
क्यों यह खबर अहम है?
CIRP में स्वीकार होने का मतलब है कि अब Aksh Optifibre Limited का प्रबंधन और नियंत्रण एक अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) के हाथों में चला गया है। दिवालियापन और दिवाला संहिता (IBC) की धारा 14 के तहत एक स्थगन (moratorium) लागू कर दिया गया है, जिससे कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और संपत्ति हस्तांतरण पर रोक लग गई है।
पूरी कहानी
Shantanu Investments Private Limited ने एक वित्तीय ऋणदाता के तौर पर यह याचिका दायर की थी। उन्होंने कुल ₹3.33 करोड़ के डिफॉल्ट का दावा किया, जिसमें ₹2 करोड़ मूलधन, ₹1.05 करोड़ ब्याज और ₹0.28 करोड़ जुर्माना ब्याज शामिल है।
कंपनी के प्रबंधन ने इस याचिका का विरोध करते हुए कंपनी के सॉल्वेंट (solvency) होने का दावा किया था और पूर्व-मौजूदा विवादों व सीमा अवधि की दलीलों को पेश किया था। हालांकि, NCLT ने वित्तीय ऋण को स्थापित पाया।
अब क्या बदलेगा?
Aksh Optifibre Limited का नियंत्रण अब IRP के पास है। शेयरधारकों के लिए अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि इस प्रक्रिया का लक्ष्य कंपनी का समाधान खोजना या उसे लिक्विडेट (liquidate) करना है।
निवेशकों के लिए जोखिम
दिवालियापन की कार्यवाही के कारण निवेशकों को महत्वपूर्ण जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी की वित्तीय अडचणी को हल करना प्राथमिक लक्ष्य है, और यदि यह संभव नहीं हुआ तो कंपनी को लिक्विडेट किया जा सकता है।
निवेशकों के लिए खास
शेयरधारकों को CIRP की प्रगति, IRP की घोषणाओं और लेनदारों की समिति (Committee of Creditors) के गठन पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। NCLT के इस फैसले से यह भी पता चलता है कि बैलेंस शीट में लगातार स्वीकार किया गया कर्ज, ऋण साबित करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
