Adani Power को लगा बड़ा झटका, बोर्ड में निदेशकों की कमी पर लगा जुर्माना
Adani Power Limited ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में बोर्ड की संरचना में अस्थायी कमी के लिए BSE और NSE को ₹1.15 लाख प्रति एक्सचेंज का जुर्माना भरा है। इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी इसी तरह की चूक के लिए कंपनी पर ₹1.55 लाख प्रति एक्सचेंज का जुर्माना लगाया गया था। इतना ही नहीं, 2024-25 में वोटिंग परिणाम फाइल करने में देरी के लिए प्रति एक्सचेंज ₹0.10 लाख का अतिरिक्त जुर्माना भी देना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
Adani Power की सालाना सीक्रेटरियल कंप्लायंस रिपोर्ट से पता चला है कि 31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष में, कंपनी SEBI के LODR रेगुलेशन्स, 2015 का पालन करने में विफल रही। 11 नवंबर, 2025 से 3 दिसंबर, 2025 के बीच, कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की संख्या निर्धारित संख्या से कम हो गई थी। इस कमी को दूर करने के लिए, कंपनी ने 4 दिसंबर, 2025 से श्री नरेंद्र नाथ मिश्रा को स्वतंत्र निदेशक के तौर पर नियुक्त किया है। कंपनी का कहना है कि खास विशेषज्ञता वाले उम्मीदवार की तलाश में देरी हुई।
निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
यह मामला कंपनी की नियामक अनुपालन (regulatory compliance) की कोशिशों को दर्शाता है। जुर्माना लगने के बावजूद, नए निदेशक की तुरंत नियुक्ति से पता चलता है कि कंपनी गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि यह एक प्रक्रियात्मक चूक थी, न कि कोई बड़ी गवर्नेंस समस्या, जिसे अब ठीक कर लिया गया है।
पिछली बार भी हुई थी ऐसी चूक
यह पहली बार नहीं है जब Adani Power को ऐसी कंप्लायंस समस्या का सामना करना पड़ा हो। पिछले वित्तीय वर्ष, 2024-25 में भी कंपनी को अप्रैल 2024 से मई 2024 के बीच बोर्ड स्ट्रेंथ में कमी के कारण जुर्माना भरना पड़ा था और नए निदेशक की नियुक्ति करनी पड़ी थी।
आगे क्या?
इस घटना के तत्काल बाद, कंपनी ने जुर्माना भर दिया है और श्री मिश्रा की नियुक्ति से बोर्ड की संरचना नियामक मानकों के अनुरूप हो गई है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे भविष्य की रिपोर्टों पर नजर रखें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कंपनी SEBI के लिस्टिंग नियमों का लगातार पालन कर रही है, खासकर बोर्ड संरचना और समय पर फाइलिंग के संबंध में।
