Refex Renewables: घाटा बढ़ा, ऑडिट पर सवाल, फिर भी कंपनी इस सेक्टर में कर रही बड़ा निवेश!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Refex Renewables: घाटा बढ़ा, ऑडिट पर सवाल, फिर भी कंपनी इस सेक्टर में कर रही बड़ा निवेश!

Refex Renewables & Infrastructure Ltd ने FY26 में **₹42.97 करोड़** का घाटा दर्ज किया है, जो पिछले साल के **₹36.40 करोड़** के मुकाबले ज़्यादा है। कंपनी को ऑडिट में कुछ सवाल खड़े हुए हैं और गोइंग कंसर्न स्टेटस पर भी चिंता है, लेकिन कंपनी कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और सोलर पावर में विस्तार कर रही है।

Refex Renewables का FY26 में घाटा बढ़ा, ऑडिट पर सवाल

Refex Renewables & Infrastructure Ltd ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹42.97 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले वित्त वर्ष के ₹36.40 करोड़ के घाटे से ज़्यादा है। कंपनी ने अपनी सालाना रिपोर्ट पेश की है, जिसमें ऑडिटर ने कुछ अहम बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं और गोइंग कंसर्न स्टेटस (Going Concern Status) पर भी चिंता जताई है।

मुख्य बातें:

  • घाटा बढ़ने और ऑडिट की चिंताओं के बीच कंपनी के फाइनेंशियल्स पर दबाव।
  • कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) में विस्तार से कंपनी को उम्मीद।

क्या हुआ है?

कंपनी की ऑपरेशन्स से होने वाली आय (Revenue from Operations) पिछले साल के ₹67.99 करोड़ से घटकर ₹66.47 करोड़ हो गई है। कंपनी के ऑडिटर ने कुछ पेमेंट्स (Trade Payables), बॉरोइंग्स (Borrowings) और फिक्स्ड डिपॉजिट्स (Fixed Deposits) को लेकर सवाल उठाए हैं, जिससे कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) पूरी तरह खत्म हो गई है।

यह क्यों मायने रखता है?

ऑडिटर्स की इन चिंताओं और कंपनी की नेट वर्थ के खत्म हो जाने से यह सवाल उठता है कि क्या कंपनी आगे भी अपना काम जारी रख पाएगी। यह निवेशकों के भरोसे और भविष्य में फंड जुटाने के विकल्पों पर असर डाल सकता है।

कंपनी की आगे की योजना

इन वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए Refex Renewables नए बिज़नेस पर फोकस कर रही है। कंपनी सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए ऑर्डर हासिल करने और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाने की योजना बना रही है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि इन नए अवसरों से कंपनी की गोइंग कंसर्न स्थिति को मजबूत किया जा सकेगा। कंपनी अपनी प्रेफरेंस शेयर्स (Preference Shares) को डिबेंचर्स (Debentures) में रीस्ट्रक्चर करने की भी योजना बना रही है।

जोखिम

कंपनी के सामने मुख्य जोखिम ऑडिटर्स की चिंताओं को दूर करना है, खासकर ट्रेड पेएबल्स, बॉरोइंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट्स को लेकर। साथ ही, कंपनी को मुनाफे में आने और अपना गोइंग कंसर्न स्टेटस बनाए रखने के लिए एक ठोस रणनीति दिखानी होगी।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी ऑडिट आपत्तियों को कैसे दूर करती है, नए कॉन्ट्रैक्ट्स कैसे हासिल करती है और अपने CBG प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक कैसे चालू करती है। 18 सितंबर, 2026 को होने वाली 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) का नतीजा भी महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.