NTPC Green Energy ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 10 गीगावाट (GW) से ज़्यादा की ऑपरेशनल कैपेसिटी हासिल की है। कंपनी का रेवेन्यू 23.09% बढ़कर ₹3,035.12 करोड़ हो गया है। खास बात यह है कि कंपनी डिविडेंड (Dividend) देने के बजाय इस मुनाफे को एक्सपेंशन (Expansion) में री-इन्वेस्ट (Re-invest) कर रही है।
NTPC Green Energy का शानदार परफॉरमेंस: 10 GW क्षमता पार, रेवेन्यू में 23% का उछाल
NTPC Green Energy Limited (NGEL) ने 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ज़बरदस्त फाइनेंशियल और ऑपरेशनल नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की कुल ऑपरेशनल कैपेसिटी 10,076 MW के महत्वपूर्ण माइलस्टोन को पार कर गई है। कंसॉलिडेटेड टोटल इनकम (Consolidated Total Income) 23.09% बढ़कर ₹3,035.12 करोड़ हो गई, वहीं कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 9.96% की बढ़त के साथ ₹521.35 करोड़ पर पहुंच गया।
ग्रोथ पर फोकस, डिविडेंड होल्ड पर
इस शानदार परफॉरमेंस के पीछे NGEL की रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में मज़बूत पकड़ साफ़ दिखती है। ऑपरेशनल कैपेसिटी और रेवेन्यू में हुई यह बढ़ोतरी कंपनी की ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को प्रभावी ढंग से स्केल करने की क्षमता को दर्शाती है। कंपनी के मैनेजमेंट ने इस बार FY 2025-26 के लिए कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं देने का फैसला किया है। सारा उपलब्ध कैश (Cash) सब्सिडियरीज़ (Subsidiaries) और जॉइंट वेंचर्स (Joint Ventures) में चल रहे और भविष्य के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) के लिए री-इन्वेस्ट (Re-invest) किया जाएगा। इसका मतलब है कि शेयरहोल्डर्स (Shareholders) को इस फाइनेंशियल ईयर में कोई भुगतान नहीं मिलेगा।
एक्सपेंशन की रफ़्तार
NGEL ग्रोथ के रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ रही है। अकेले FY 2025-26 में ही कंपनी ने 4,174 MW की कैपेसिटी ऐड की है। कंपनी की जनरेशन (Generation) में भी 112% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो 14.60 बिलियन यूनिट तक पहुँच गई है। यह सब कंपनी के 2032 तक 60 GW क्षमता तक पहुँचने के स्ट्रेटेजिक एम (Strategic Aim) का हिस्सा है, जिसमें एनर्जी स्टोरेज (Energy Storage) और ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) जैसे क्षेत्रों में डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) भी शामिल है।
आगे क्या?
कंपनी ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (Non-Convertible Debentures) के ज़रिए ₹1,500 करोड़ सफलतापूर्वक जुटाए हैं और दो नई सब्सिडियरीज़ (Subsidiaries) को शामिल किया है। हालांकि, ऑडिटर्स (Auditors) ने अभी भी कुछ बैलेंस कन्फर्मेशन (Balance Confirmations) और रिकंसिलिएशन (Reconciliations) पेंडिंग होने की बात कही है। जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी (Transmission Connectivity) और सप्लाई चेन (Supply Chain) जैसे ऑपरेशनल चैलेंज (Operational Challenges) भी बने हुए हैं। बोर्ड मीटिंग कोरम (Board Meeting Quorum) की गैर-अनुपालन (Non-compliance) के लिए ₹23,600 का एक छोटा जुर्माना भी मिला है, जिसके खिलाफ अपील की जा रही है।
