KPI Green Energy ने अपना नया 'KP 3.0' रोडमैप पेश किया है। कंपनी ने FY32 तक **10 GWp** की कैपेसिटी हासिल करने का लक्ष्य रखा है और साथ ही पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई बड़े गवर्नेंस सुधारों का ऐलान किया है।
KP 3.0 का विजन
KPI Green Energy और KP ग्रुप ने FY32 तक 10 GWp IPP, 10 GWp EPC और 10 GWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस प्लान के तहत कंपनी 25% का रेवेन्यू CAGR हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
पारदर्शिता पर जोर
कंपनी ने लंबे समय से निवेशकों की चिंता का कारण बने गवर्नेंस मुद्दों को हल करने के लिए कई कदम उठाए हैं:
- BDO को ऑडिटर नियुक्त किया गया है।
- रॉयल्टी पेमेंट पर एक निश्चित सीलिंग (सीमा) लगाई गई है।
- प्रमोटर-प्लेज्ड शेयरों को मार्च 2027 तक पूरी तरह खत्म करने का स्पष्ट रोडमैप दिया गया है।
काम का बंटवारा (Business Realignment)
ग्रुप ने काम को सुव्यवस्थित करने के लिए तीन हिस्सों में जिम्मेदारी बांटी है:
- KPI Green Energy: 50 MW से बड़े IPP और EPC प्रोजेक्ट्स।
- KP Energy: विंड EPC और 50 MW से बड़े हाइब्रिड ऑर्डर्स।
- Sun Drops Energia: BESS और छोटे स्तर के हाइब्रिड या कैप्टिव प्रोजेक्ट्स।
अब आगे क्या?
30 जून 2026 तक कंपनी का रिन्यूएबल पोर्टफोलियो 9.2 GWp से ज्यादा रहा है। वहीं, KP Green Engineering की ऑर्डर बुक 31 मार्च 2026 तक लगभग ₹1,831 करोड़ थी। निवेशकों को अब कंपनी के क्षमता विस्तार और प्रमोटर प्लेज घटाने की प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
