Inox Green Energy ने बदला बिजनेस मॉडल, FY27 EBITDA पर बड़ा दांव
Inox Green Energy Services Ltd एक बड़े स्ट्रेटेजिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। कंपनी 100% टर्नकी EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मॉडल से हटकर इक्विपमेंट सप्लाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि उसके कुल बिजनेस का 75-80% हिस्सा इक्विपमेंट सप्लाई से आए।
क्या है खास?
कंपनी ने हाल ही में Q4 FY26 और 31 मार्च 2026 को खत्म हुए पूरे साल के नतीजे जारी किए हैं। Q4 FY26 में Inox Green का कुल रेवेन्यू ₹120 करोड़ और नेट प्रॉफिट (Profit After Tax) ₹28 करोड़ रहा। वहीं, Inox Wind (कंसोलिडेटेड) ने Q4 FY26 में ₹1,306 करोड़ का रेवेन्यू, ₹333 करोड़ का EBITDA और ₹106 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।
सबसे अहम बात यह है कि Inox Green को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से अपने इवेक्यूएशन इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस के डीमर्जर (Demerger) के लिए मंजूरी मिल गई है। उम्मीद है कि इससे कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी, ROE (Return on Equity) और ROCE (Return on Capital Employed) में सुधार होगा, क्योंकि लगभग ₹1,000 करोड़ का ग्रॉस ब्लॉक और उससे जुड़ा डेप्रिसिएशन (Depreciation) हट जाएगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह स्ट्रेटेजिक बदलाव वर्किंग कैपिटल की दिक्कतों और EPC सेगमेंट में लागत बढ़ने जैसी पुरानी समस्याओं को दूर करने के लिए किया गया है। इक्विपमेंट सप्लाई पर फोकस करने से Inox Green को लिक्विडिटी (Liquidity) में सुधार और एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) कम होने की उम्मीद है। कंपनी ने एक पॉजिटिव आउटलुक भी दिया है, जिसके अनुसार FY27 में EBITDA ₹600 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है। यह ऑर्गेनिक ग्रोथ (Organic Growth), एक्वायर्ड एसेट्स (Acquired Assets) के कंसॉलिडेशन (Consolidation) और हाई-मार्जिन सर्विसेज (High-margin Services) से संभव होगा।
पहले क्या था?
पहले Inox Green पूरी तरह से टर्नकी EPC मॉडल पर काम करती थी। कंपनी ने रिन्यूएबल एनर्जी ऑपरेशंस और मेंटेनेंस (O&M) में 13 GWp से ज्यादा का पोर्टफोलियो बनाया है। कंपनी के पास 3.1 GW का ऑर्डर बुक है, जो 24 महीने से ज्यादा की एग्जीक्यूशन विजिबिलिटी (Execution Visibility) देता है। FY26 में 600 MW का ऑर्डर जोड़ा गया।
अब क्या बदलेगा?
बिजनेस मॉडल में बदलाव का मतलब है कि अब फुल प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (Full Project Execution) के बजाय विंड टरबाइन कंपोनेंट्स (Wind Turbine Components) बेचने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि FY27 की पहली छमाही तक पुराने EPC प्रोजेक्ट्स ज्यादातर पूरे हो जाएंगे और ऑर्डर बुक में इक्विपमेंट सप्लाई का हिस्सा बढ़ेगा। इवेक्यूएशन इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस का डीमर्जर ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करने और फाइनेंशियल मेट्रिक्स (Financial Metrics) को बेहतर बनाने के लिए एक स्ट्रक्चरल चेंज है।
जोखिम क्या हैं?
निवेशकों को एग्जीक्यूशन से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देना चाहिए। पहले भी जियो-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions), सप्लाई चेन में रुकावटें (खासकर ECS कंपोनेंट्स के लिए) और PSU कॉन्ट्रैक्ट्स (PSU Contracts) से पेमेंट में देरी जैसी समस्याएं देखी गई हैं। लॉजिस्टिक्स (Logistics) और ग्रिड कनेक्टिविटी (Grid Connectivity) जैसे बाहरी कारक पूर्वानुमान की सटीकता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि यह बदलाव वर्किंग कैपिटल को बेहतर बनाने के लिए है, लेकिन कुछ पुराने EPC कॉन्ट्रैक्ट्स अभी भी पूरे होने के करीब हैं।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को नए इक्विपमेंट सप्लाई-आधारित स्ट्रैटेजी के एग्जीक्यूशन की प्रगति, पुराने EPC कॉन्ट्रैक्ट्स के सफल समापन और FY27 के EBITDA गाइडेंस को हासिल करने पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। डीमर्जर का फाइनेंशियल रेश्यो (Financial Ratios) पर असर भी एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा।
