Glittek Granites Ltd अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और रिन्यूएबल ईपीसी (EPC) के क्षेत्र में कदम रख रही है। कंपनी **₹150 करोड़** की एक नई परियोजना शुरू कर रही है। वित्तीय वर्ष 27 की पहली तिमाही में कंपनी ने **₹0.1682 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, हालांकि ऑपरेशनल रेवेन्यू शून्य रहा। यह नए प्रबंधन के तहत एक बड़ा बिज़नेस ट्रांसफॉर्मेशन है।
Glittek Granites की नई ऊर्जा क्रांति: ₹150 करोड़ का BESS प्रोजेक्ट
Glittek Granites Ltd ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और रिन्यूएबल इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) में अपनी नई बिज़नेस लाइन की घोषणा की है। यह कंपनी के लिए एक बड़ा कदम है।
क्या है नया?
कंपनी ने BESS और रिन्यूएबल ईपीसी (EPC) सेवाओं को शामिल करने वाली एक नई बिज़नेस लाइन को मंजूरी दी है। इसमें रोबोटिक्स का उपयोग करके बैटरी सेल की पैकेजिंग और असेंबली, सोलर पीवी और BESS प्रोजेक्ट ईपीसी, और ऑपरेशंस व मेंटेनेंस शामिल हैं। कंपनी इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹150 करोड़ बता रही है, और जमीन अधिग्रहण के बाद इसे पूरा होने में 10-12 महीने का समय लगेगा।
वित्तीय वर्ष 27 की पहली तिमाही में, Glittek Granites ने ₹0.1682 करोड़ (यानी ₹16.82 लाख) का नेट प्रॉफिट कमाया। हालांकि, पिछले साल की इसी तिमाही में ₹0.0468 करोड़ (यानी ₹4.68 लाख) की तुलना में इस बार ऑपरेशन से रेवेन्यू शून्य रहा। यह प्रॉफिट मुख्य रूप से 'अन्य आय' (other income) से आया है।
क्यों है यह ज़रूरी?
यह रणनीतिक बदलाव Glittek Granites के लिए एक मौलिक परिवर्तन का संकेत देता है। कंपनी अपने पारंपरिक ग्रेनाइट बिज़नेस से हटकर अब कैपिटल-इंटेंसिव रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में उतर रही है। ₹150 करोड़ का यह भारी निवेश इस नए वेंचर के प्रति कंपनी की गंभीरता को दर्शाता है। वहीं, ऑपरेशनल रेवेन्यू का शून्य होना इस बदलाव के शुरुआती चरण और मुनाफे के लिए 'अन्य आय' पर निर्भरता को उजागर करता है।
पूरी कहानी
कंपनी के प्रबंधन और नियंत्रण में हालिया बदलावों को इन रणनीतिक और गवर्नेंस शिफ्ट्स का मुख्य कारण बताया जा रहा है। इसमें नए स्टेट्यूटरी और सीक्रेटेरियल ऑडिटर की नियुक्ति और रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट का बदलना शामिल है। कंपनी का कॉर्पोरेट ऑफिस अहमदाबाद भी शिफ्ट किया जा रहा है।
अब क्या बदलेगा?
Glittek Granites अब बढ़ते BESS और रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट में अपनी पहचान बनाने की राह पर है। कंपनी नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण और उसके विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी, साथ ही प्रशासनिक और गवर्नेंस ट्रांजिशन का भी प्रबंधन करेगी।
जोखिमों पर नज़र
मुख्य जोखिमों में ₹150 करोड़ की BESS परियोजना का सफल एग्जीक्यूशन, इसके डेवलपमेंट पीरियड में संभावित देरी, नई सेवाओं की मार्केट में स्वीकार्यता और एक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में ऑपरेशनल रेवेन्यू उत्पन्न करने की क्षमता शामिल है। वर्तमान लाभ के लिए 'अन्य आय' पर निर्भरता भी एक जोखिम है।
तुलना
Glittek Granites ऐसे सेक्टर में प्रवेश कर रही है जहाँ रिन्यूएबल ईपीसी और BESS में पहले से ही स्थापित खिलाड़ी मौजूद हैं। Sterling and Wilson Renewable Energy, Tata Power Renewables, और Inox Wind जैसी कंपनियां इसी तरह के डोमेन में सक्रिय हैं, जिनके पास अक्सर महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पाइपलाइन और स्थापित ऑपरेशनल ट्रैक रिकॉर्ड होता है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
Q1 FY27 के लिए, Glittek Granites ने ₹0.1682 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। ऑपरेशन से रेवेन्यू शून्य रहा, जो Q1 FY26 के ₹0.0468 करोड़ से कम है। नई BESS और ईपीसी (EPC) वेंचर के लिए अनुमानित प्रोजेक्ट लागत ₹150 करोड़ है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को जमीन अधिग्रहण की प्रगति, BESS और ईपीसी (EPC) वेंचर के प्रोजेक्ट टाइमलाइन और वास्तविक ऑपरेशनल रेवेन्यू के विकास पर नज़र रखनी चाहिए। बोर्ड कंपोजिशन में बदलाव और नए बिज़नेस से संबंधित रेगुलेटरी अप्रूवल भी महत्वपूर्ण होंगे।
