Victoria Enterprises के लिए FY26 का फाइनेंशियल ईयर काफी चुनौतीपूर्ण रहा। कंपनी का मुनाफा गिरकर **₹1.29 करोड़** रह गया है, जबकि ऑडिटर ने **₹10 करोड़** के प्रेफरेंस शेयर रिडेम्पशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही, कंपनी में लंबे समय से CFO और कंपनी सेक्रेटरी जैसे पद खाली पड़े हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और चुनौतियां
कंपनी के हालिया नतीजों के अनुसार, ऑपरेशनल रेवेन्यू घटकर ₹53.65 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹83.33 करोड़ था। इसके साथ ही नेट प्रॉफिट भी गिरकर ₹1.29 करोड़ पर आ गया है। बोर्ड ने इस साल कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं देने का फैसला किया है।
ऑडिटर का 'Qualified Opinion'
कंपनी की सबसे बड़ी मुश्किल ₹10 करोड़ के 5% नॉन-क्यूम्युलेटिव रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स (Preference Shares) को लेकर है। ऑडिटर का कहना है कि ये शेयर्स ओवरड्यू (Overdue) हो चुके हैं और इन्हें करंट लायबिलिटी के तौर पर दिखाया जाना चाहिए था, जिसे कंपनी ने नजरअंदाज किया।
गवर्नेंस और कंप्लायंस में बड़ी चूक
कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कई नियमन संबंधी विफलताएं स्वीकार की हैं:
- KMP की कमी: अप्रैल 2022 से CFO का पद खाली है और अक्टूबर 2024 से कंपनी के पास कोई कंपनी सेक्रेटरी नहीं है।
- कमेटी लैप्स: नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी का गठन SEBI नियमों के अनुसार नहीं है।
- रेगुलेटरी उल्लंघन: कंपनी ने ब्याज मुक्त लोन और इन्वेस्टमेंट के नियमों में भी चूक की है।
प्रोजेक्ट्स का स्टेटस
दादर में 'Pittie Paradise' और BKC, मुंबई में 'Pittie Chambers' प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, लेकिन वर्किंग कैपिटल की कमी और मार्केट में अस्थिरता के कारण इनके पूरा होने में देरी हो रही है।
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता लिक्विडिटी स्ट्रेस और गवर्नेंस का अभाव है, जिसे बारीकी से ट्रैक करना जरूरी है।
