Viceroy Hotels ने Q1 FY27 में शानदार वापसी की है। कंपनी ने पिछले साल के घाटे को पीछे छोड़ते हुए **₹1.45 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है। कंपनी का रेवेन्यू भी **70.8%** बढ़कर **₹45.19 करोड़** हो गया है, जिसका मुख्य कारण हैदराबाद में **Marriott Executive Apartments** का **₹206 करोड़** में किया गया अधिग्रहण है।
Viceroy Hotels Q1 FY27: मुनाफे में जोरदार उछाल और बड़ी डील
- कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू: ₹45.19 करोड़
- कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT): ₹1.45 करोड़
मुख्य बात: ऑपरेशनल एफिशिएंसी और हैदराबाद में बड़ी डील से मुनाफे और रेवेन्यू में जबरदस्त बढ़ोतरी।
क्या हुआ?
Viceroy Hotels Ltd. ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी ने तगड़ा टर्नअराउंड दिखाया है। कंपनी ने ₹1.45 करोड़ का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में ₹3.02 करोड़ का घाटा हुआ था। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 70.8% बढ़कर ₹45.19 करोड़ तक पहुंच गया।
क्यों है यह अहम?
मुनाफे में वापसी कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कॉस्ट मैनेजमेंट में सुधार का संकेत देती है। रेवेन्यू में भारी बढ़ोतरी और EBITDA मार्जिन का 18.2% से बढ़कर 26.1% होना, खासकर हैदराबाद में, कंपनी की मजबूत होती बाजार स्थिति को दर्शाता है। ₹206 करोड़ में Marriott Executive Apartments का अधिग्रहण एक बड़ी स्ट्रेटेजिक चाल है, जिससे कंपनी के रूम इन्वेंटरी और मार्केट प्रेजेंस में इजाफा होगा।
क्या है पूरी कहानी?
Q1 FY27 में, Viceroy Hotels ने ₹1.45 करोड़ का PAT दर्ज कर मुनाफा कमाया, जबकि Q1 FY26 में ₹3.02 करोड़ का घाटा था। रेवेन्यू ₹26.45 करोड़ से बढ़कर ₹45.19 करोड़ हो गया, जो 70.8% की बढ़त है। EBITDA में भी 144.5% की जोरदार बढ़त दर्ज की गई, जो ₹11.79 करोड़ रहा।
अब क्या बदलेगा?
हैदराबाद के गचीबोवली में स्थित Marriott Executive Apartments को ₹206 करोड़ में खरीदने से कंपनी के पोर्टफोलियो में 75 एग्जीक्यूटिव रूम और 1.65 लाख वर्ग फुट की जगह जुड़ गई है। कंपनी ने प्रॉपर्टी रेनोवेशन के लिए ₹100 करोड़ से ज्यादा का प्लान भी बनाया है, जिसमें पहला फेज पूरा हो चुका है और दूसरा फेज FY27 में और तीसरा FY28 में पूरा होने की उम्मीद है।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
पहले जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने हॉस्पिटैलिटी डिमांड को प्रभावित किया था, जिससे ADR, ऑक्यूपेंसी और RevPAR जैसे मेट्रिक्स पर असर पड़ा था। निवेशकों को ब्रॉडर मैक्रोइकोनॉमिक कंडीशन पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इनका हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की रिकवरी पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक फेज II और फेज III रेनोवेशन प्लान की प्रगति और कंप्लीशन पर बारीकी से नजर रखेंगे। मैक्रोइकोनॉमिक चुनौतियों के बीच वर्तमान ऑक्यूपेंसी और मार्जिन लेवल को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
