Viceroy Hotels Share Price: बड़े एक्विजिशन के बीच प्रॉफिट में 76% की भारी गिरावट!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Viceroy Hotels Share Price: बड़े एक्विजिशन के बीच प्रॉफिट में 76% की भारी गिरावट!

Viceroy Hotels ने हैदराबाद के मैरियट एग्जीक्यूटिव अपार्टमेंट्स को **₹207.45 करोड़** में खरीद लिया है। हालांकि, कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की तुलना में **76%** गिरकर **₹18.07 करोड़** पर आ गया है। कंपनी ने डायरेक्टोरेट से जुड़े एक बड़े मुकदमे का भी निपटारा किया है।

Viceroy Hotels: प्रॉफिट में गिरावट के बीच हैदराबाद मैरियट का अधिग्रहण

कंपनी ने हैदराबाद में मैरियट एग्जीक्यूटिव अपार्टमेंट्स का अधिग्रहण ₹207.45 करोड़ में पूरा कर लिया है। वहीं, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल के ₹76.41 करोड़ से 76% गिरकर ₹18.07 करोड़ पर आ गया है।

क्यों यह खबर अहम है?

इस अधिग्रहण से Viceroy Hotels की हैदराबाद में मौजूदगी और मजबूत होगी, जिससे पोर्टफोलियो में प्रीमियम मैरियट-ब्रांडेड प्रॉपर्टीज का इजाफा होगा। लेकिन, रेवेन्यू और EBITDA में मामूली बढ़त के बावजूद PAT में आई इतनी बड़ी गिरावट कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी, फाइनेंसिंग कॉस्ट या अन्य खर्चों पर सवाल खड़े करती है।

क्या है पूरी कहानी?

Viceroy Hotels के पास पहले से हैदराबाद में मैरियट ब्रांड के तीन होटल हैं, जिनमें कुल 538 कीज (कमरे) हैं। कंपनी ₹100 करोड़ से अधिक के कैपिटल एक्सपेंडिचर के साथ प्रॉपर्टीज के रिनोवेशन का काम कर रही है। एक अहम डेवलपमेंट यह है कि Courtyard by Marriott Hyderabad प्रॉपर्टी से जुड़ा डायरेक्टोरेट ऑफ एन्फोर्समेंट (ED) के साथ लंबा विवाद अब सुलझ गया है।

अब क्या बदलेगा?

इस नए अधिग्रहण से कंपनी के ऑपरेशंस में जुड़ाव आएगा, जिससे भविष्य में रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है। ED के साथ विवाद का समाधान एक बड़ी राहत है, जिससे एक अहम एसेट पर अनिश्चितता का बादल छंट गया है। कंपनी ने FY 2025-26 के लिए कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं देने का फैसला किया है, जो री-इन्वेस्टमेंट या डेट मैनेजमेंट पर फोकस का संकेत देता है।

जोखिम जिन पर नजर

जहां एक ओर अधिग्रहण ग्रोथ का जरिया है, वहीं PAT में आई भारी गिरावट पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। कंपनी का स्टैंडअलोन लॉन्ग-टर्म बोरिंग (कर्ज) काफी बढ़कर ₹208.30 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹46.63 करोड़ था। बढ़ते इंटरेस्ट कॉस्ट से भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। साथ ही, ऑक्यूपेंसी रेट में भी गिरावट देखी गई है।

अगली बड़ी चाल क्या?

इन्वेस्टर्स इस बात पर नजर रखेंगे कि नया एक्वायर किया गया प्रॉपर्टी कैसा प्रदर्शन करता है और कंपनी अपने बढ़े हुए कर्ज को कैसे मैनेज करती है। चल रहे रिनोवेशन और भविष्य की नई परियोजनाओं का प्रॉफिटेबिलिटी पर क्या असर पड़ता है, यह भी देखना अहम होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.