Vedanta Limited ने अपने रियल एस्टेट बिज़नेस को Vedanta Property Platforms Limited (VPPL) नाम की नई कंपनी में अलग करने का ऐलान किया है। इस डीमर्जर के तहत, Vedanta के हर **20** शेयर रखने वाले निवेशकों को VPPL का **1** शेयर मिलेगा।
Vedanta का बड़ा ऐलान: रियल एस्टेट का होगा डीमर्जर
Vedanta Limited ने अपने रियल एस्टेट बिज़नेस को Vedanta Property Platforms Limited (VPPL) नाम की नई कंपनी में अलग करने का ऐलान किया है। इस कॉर्पोरेट एक्शन के तहत, Vedanta के हर 20 शेयर रखने वाले शेयरधारकों को VPPL का 1 शेयर मिलेगा। कंपनी के प्रमोटर्स के पास इस नई इकाई में 54.72% हिस्सेदारी रहने की उम्मीद है।
क्यों हो रहा है यह डीमर्जर?
इस कदम का मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट कारोबार के लिए एक 'प्योर-प्ले' प्लेटफॉर्म तैयार करना है। इससे रियल एस्टेट एसेट्स का खास मैनेजमेंट और फोकस किया जा सकेगा, जो Vedanta के मुख्य नेचुरल रिसोर्सेज बिज़नेस से अलग होगा। माना जा रहा है कि इससे रियल एस्टेट संपत्ति का स्वतंत्र मूल्यांकन संभव होगा और छुपी हुई वैल्यू सामने आएगी।
रियल एस्टेट बिज़नेस की वर्तमान स्थिति
Vedanta Limited के कुल बिज़नेस में रियल एस्टेट का हिस्सा अभी बहुत छोटा है। 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए, डीमर्ज होने वाले इस बिज़नेस का अकेले का टर्नओवर सिर्फ ₹1.26 करोड़ था, जो Vedanta Limited के कुल अकेले टर्नओवर का महज 0.001% है।
शेयरधारकों के लिए क्या बदलेगा?
अब Vedanta के मौजूदा शेयरधारकों का VPPL में शेयरधारिता के जरिए रियल एस्टेट एसेट्स में अप्रत्यक्ष आर्थिक हित होगा। इस नई कंपनी का स्वतंत्र रूप से मैनेजमेंट किया जाएगा और भविष्य में इसे लिस्ट भी किया जा सकता है। कंपनी का अनुमान है कि इस ट्रांजेक्शन के लिए स्टाम्प ड्यूटी के तौर पर लगभग ₹73 करोड़ का खर्च आएगा।
इन जोखिमों पर रखें नज़र
इस डीमर्जर से जुड़े कुछ प्रमुख जोखिम भी हैं। इनमें ₹73 करोड़ की अनुमानित स्टाम्प ड्यूटी सहित ट्रांजेक्शन की बड़ी लागत शामिल है। पूरी प्रक्रिया को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और स्टॉक एक्सचेंजों जैसी विभिन्न वैधानिक और नियामक संस्थाओं से मंजूरी लेनी होगी, जिसमें समय लग सकता है और अनिश्चितता बनी रह सकती है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि डीमर्जर प्रक्रिया के पूरा होने की उम्मीद FY28 तक है, जो एक लंबी कार्यान्वयन समय-सीमा को दर्शाता है।
