TCI Industries ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने पिछले साल के **₹2.24 करोड़** के घाटे को पाटते हुए **₹0.49 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू **78.83%** बढ़कर **₹5.06 करोड़** हो गया है, जिसका मुख्य कारण प्रॉपर्टी से मिली आय है।
TCI Industries की FY26 में मुनाफे में वापसी
TCI Industries ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए अपने नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने ₹0.49 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) के ₹2.24 करोड़ के शुद्ध घाटे से एक बड़ा बदलाव है। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में 78.83% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई, जो FY26 में ₹5.06 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹2.83 करोड़ था। इसके अलावा, कंपनी का EBITDA भी सुधरकर ₹1.08 करोड़ हो गया, जो FY25 में ₹1.85 करोड़ के निगेटिव EBITDA से काफी बेहतर है।
मुनाफे में क्यों आई कंपनी?
यह वापसी TCI Industries के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो इसके वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार दिखाती है। रेवेन्यू में यह ज़बरदस्त बढ़ोतरी और मुनाफे में आना कंपनी के कामकाज में सुधार और बिजनेस परफॉरमेंस को दर्शाता है। कंपनी ने अपने कोलाबा स्थित प्रॉपर्टी से भी आय उत्पन्न करना शुरू कर दिया है, जो कि सी-रिटेनिंग वॉल की मरम्मत और पुनर्निर्माण के बाद संभव हुआ है।
कंपनी की पिछली स्थिति
पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) में TCI Industries ने शुद्ध घाटा और निगेटिव EBITDA दर्ज किया था, जो इसके वित्तीयChallenges को दर्शाता है। हालांकि, कंपनी ने अपने कामकाज को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं, जिसमें कोलाबा की प्राइम प्रॉपर्टी पर मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम भी शामिल है।
आगे क्या उम्मीद?
कंपनी के मुनाफे में वापसी और पॉजिटिव EBITDA से निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। कंपनी ने अपने प्रमोटरों और संबंधित पक्षों को नॉन-कन्वर्टिबल रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स (NCRPS) जारी करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसका उद्देश्य वर्किंग कैपिटल और प्रॉपर्टी के नवीनीकरण के लिए फंड जुटाना है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और भविष्य के विकास का समर्थन करने की एक रणनीतिक चाल है।
जोखिम जिस पर नज़र रखनी होगी
कंपनी को मुंबई नगर निगम (MCGM) के साथ प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर एक बड़े मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें ब्याज सहित ₹77.81 करोड़ की मांग बकाया है। इसके अलावा, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ एक कानूनी विवाद भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ये कानूनी मामले कंपनी की वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकते हैं।
मुख्य आंकड़े:
- रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस: FY26 में ₹5.06 करोड़ (FY25 में ₹2.83 करोड़)
- नेट प्रॉफिट/(लॉस) आफ्टर टैक्स: FY26 में ₹0.49 करोड़ (FY25 में ₹(2.24) करोड़)
- EBITDA: FY26 में ₹1.08 करोड़ (FY25 में ₹(1.85) करोड़)
- प्रॉपर्टी टैक्स विवाद: ₹77.81 करोड़ (अप्रैल 2010 - मार्च 2026 तक)
आगे क्या देखना है?
निवेशक अब MCGM के साथ प्रॉपर्टी टैक्स मुकदमे और कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ कानूनी विवाद के नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे। कंपनी की मुनाफा बनाए रखने की क्षमता और वर्किंग कैपिटल को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना भी महत्वपूर्ण कारक होंगे।
