Sri Lakshmi Saraswathi Textiles Arni ने वित्त वर्ष 2025-26 में **₹15.74 करोड़** का लॉस बिफोर टैक्स (Loss Before Tax) दर्ज किया है। कंपनी अब टेक्सटाइल सेक्टर की मुश्किलों के बीच अपनी जमीन बेचकर रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन की ओर फोकस करने की योजना बना रही है।
Detailed Coverage
टेक्सटाइल कारोबार में मुश्किलों के बीच रियल एस्टेट में कदम
Sri Lakshmi Saraswathi Textiles Arni ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की कुल आय (Total Income) इसी अवधि में ₹88.14 करोड़ रही, जो पिछले वित्तीय वर्ष के ₹100.23 करोड़ से कम है। इसके चलते, कंपनी ने ₹15.74 करोड़ का लॉस बिफोर टैक्स दर्ज किया है। हालांकि, यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज ₹21.14 करोड़ के घाटे से थोड़ा बेहतर है। कंपनी की प्रति शेयर आय (Basic EPS) -₹47.24 रही, जो पिछले साल के -₹62.13 की तुलना में सुधरी है।
क्यों उठाया ये बड़ा कदम?
कंपनी के नतीजों से पता चलता है कि उसके टेक्सटाइल बिजनेस में बड़ी चुनौतियां हैं। कॉटन की बढ़ी कीमतें और सिंथेटिक इम्पोर्ट से बढ़ती प्रतिस्पर्धा मुनाफे को प्रभावित कर रही है। ऐसे में, कंपनी अपनी बेकार पड़ी जमीन को बेचकर रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन में जाने की योजना बना रही है। यह कदम कंपनी के लिए जरूरी रेवेन्यू जुटाने और कैश फ्लो को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इस बड़े बदलाव के लिए कंपनी को शेयरधारकों से मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (Memorandum of Association) में संशोधन के लिए मंजूरी लेनी होगी।
क्या है पिछला इतिहास?
टेक्सटाइल सेक्टर इन दिनों मुश्किलों का सामना कर रहा है। Sri Lakshmi Saraswathi Textiles Arni को लगातार घाटा हो रहा है और उसका नेट वर्थ (Net Worth) पूरी तरह खत्म हो गया है। इसी वजह से कंपनी के ऑडिटर ने 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) पर सवाल उठाए हैं, यानी कंपनी के भविष्य में संचालन जारी रखने की क्षमता पर संदेह जताया है।
अब क्या बदलेगा?
अगर शेयरधारक मंजूरी देते हैं, तो कंपनी आधिकारिक तौर पर रियल एस्टेट डेवलपमेंट, कंस्ट्रक्शन और प्रॉपर्टी लीजिंग जैसे कारोबार में भी उतर जाएगी। इस स्ट्रेटेजिक बदलाव से कंपनी अपनी मौजूदा जमीन का बेहतर इस्तेमाल करके अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने की कोशिश करेगी।
जोखिम क्या हैं?
ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' वाली राय एक बड़ी चिंता का विषय है। नेट वर्थ का खत्म होना और लगातार घाटे की वजह से कंपनी के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा, ESI, EPF, TDS/TCS और GST जैसे बड़े सरकारी बकाया का भुगतान न होना, अनुपालन (Compliance) के जोखिम पैदा करता है। ऑडिटर ने एडवांस और देनदारियों (Receivables) के लिए बैलेंस कन्फर्मेशन न होने का भी जिक्र किया है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को रियल एस्टेट की योजना पर करीब से नजर रखनी चाहिए। इसमें शेयरधारकों की मंजूरी और जमीन की बिक्री से फंड मिलने की हकीकत शामिल है। ऑडिटर की चिंताओं, खासकर 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस और सरकारी नियमों के पालन पर कंपनी के कदमों पर नजर रखना अहम होगा।
