Shelter Infra Projects Ltd: घाटे में कंपनी, ऑडिट रिपोर्ट पर भी सवाल, निवेशकों की चिंता बढ़ी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Shelter Infra Projects Ltd: घाटे में कंपनी, ऑडिट रिपोर्ट पर भी सवाल, निवेशकों की चिंता बढ़ी

Shelter Infra Projects Ltd ने मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही में **₹3.95 लाख** का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट पर भी सवाल उठे हैं।

Shelter Infra Projects Ltd को भारी नुकसान, ऑडिट रिपोर्ट पर भी उठे सवाल

Shelter Infra Projects Ltd के लिए वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे निराशाजनक रहे। कंपनी ने ₹3.95 लाख का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में ₹3.58 लाख का मुनाफा (Profit) हुआ था।

आय में भी गिरावट:

तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 8.37% घटकर ₹54.92 लाख रह गया, जो पिछले साल ₹59.94 लाख था। पूरे वित्तीय वर्ष 2026 की बात करें तो कंपनी को ₹4.55 लाख का कुल घाटा हुआ, जबकि FY25 में ₹23.18 लाख का मुनाफा था।

क्यों है चिंता की बात?

निवेशकों के लिए यह डबल झटका है - एक तरफ घटता रेवेन्यू और मुनाफा, दूसरी तरफ ऑडिटर की क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion)। ऑडिटर ने कुछ ऐसी देनदारियों (Liabilities) और असेट्स के मूल्यांकन (Asset Valuation) पर सवाल उठाए हैं, जिनकी पूरी जानकारी या स्पष्टता नहीं है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की रिपोर्टिंग पर असर पड़ सकता है।

बदल रहा बिजनेस मॉडल?

कंपनी का मुख्य कमाई का जरिया अब कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी की जगह रेंटल इनकम (Rental Income) बनता दिख रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने कोर बिजनेस से दूर जा रही है। इसके अलावा, कंपनी 2014 से मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) के साथ एक कानूनी विवाद में भी उलझी हुई है।

आगे क्या?

शेयरधारकों को कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू स्रोतों और ऑडिटर की चिंताओं को दूर करने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी होगी। MES के साथ चल रहे मुकदमे का नतीजा भी अहम होगा। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की बैलेंस शीट के अनुसार, कुल संपत्ति (Total Assets) ₹33.20 करोड़ और देनदारियां (Liabilities) ₹29.37 करोड़ थीं।

जोखिम (Risks):

कंपनी पर लीज रेंट से जुड़ी देनदारियों का जोखिम है। साथ ही, ₹94.30 लाख के नॉन-करंट इन्वेस्टमेंट्स (Non-current Investments) के मूल्यांकन को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। MES के साथ चल रहे केस का कंपनी की वित्तीय सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

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