Raymond Realty ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी ने कमाल का प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 429% बढ़कर **₹2,990.79 करोड़** हो गया, जबकि कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 1614% की भारी उछाल के साथ **₹304.59 करोड़** पर पहुंच गया। कंपनी ने निवेशकों के लिए **₹2** प्रति शेयर के डिविडेंड (Dividend) का भी ऐलान किया है।
Raymond Realty के FY26 के नतीजे: दमदार ग्रोथ
Raymond Realty ने हाल ही में अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी ने जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 429% बढ़कर ₹2,990.79 करोड़ रहा, जो पिछले साल यानी FY25 में ₹565.18 करोड़ था। वहीं, कंसोलिडेटेड PAT में 1614% का शानदार इजाफा देखने को मिला और यह ₹17.77 करोड़ से बढ़कर ₹304.59 करोड़ हो गया। कंपनी की प्री-सेल्स बुकिंग वैल्यू भी 31% बढ़कर ₹3,023 करोड़ रही।
क्यों है यह अहम?
ये आंकड़े Raymond Realty के डी-मर्जर के बाद एक स्वतंत्र कंपनी के तौर पर मजबूत फाइनेंशियल प्रदर्शन को दर्शाते हैं। रेवेन्यू और प्रॉफिट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कंपनी के ऑपरेशन्स के विस्तार और बिजनेस स्ट्रैटेजी के सफल कार्यान्वयन का प्रमाण है। प्री-सेल्स बुकिंग का अनुमान से बेहतर प्रदर्शन और पहली बार डिविडेंड का ऐलान, कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों को रिटर्न देने की क्षमता को दिखाता है।
कंपनी की स्ट्रैटेजी
Raymond Realty एक प्योर-प्ले रियल एस्टेट डेवलपर के तौर पर काम करती है। डी-मर्जर के बाद, कंपनी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर फोकस कर रही है। इसके लिए वह कैपिटल-लाइट जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) मॉडल का इस्तेमाल कर रही है। इस मॉडल से कंपनी को जमीन खरीदने में कम पूंजी लगानी पड़ती है और वह अपने पोर्टफोलियो को तेजी से बढ़ा सकती है। FY2026 तक, कंपनी ने ₹17,000 करोड़ ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) वाले 7 JDAs साइन किए हैं। इसके अलावा, थाणे में कंपनी के पास अपनी जमीन भी है, जिससे ₹25,000 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है।
आगे क्या?
कंपनी के प्री-सेल्स बुकिंग में थाणे स्थित जमीन और नए JDA प्रोजेक्ट्स का योगदान 50-50% रहा है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर (20% पेआउट) का पहला डिविडेंड देने की सिफारिश की है, जो डी-मर्जर के बाद कंपनी की कैश जनरेट करने की क्षमता पर भरोसा दिखाता है।
जोखिम
- कंपनी का मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) मार्केट पर अधिक निर्भर रहना।
- रियल एस्टेट सेक्टर में पूंजी की जरूरत, रेगुलेटरी, कानूनी और पर्यावरणीय चुनौतियां।
- नए JDA प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन में जोखिम और समय पर डिलीवरी।
