Puravankara का दमदार प्रदर्शन
Puravankara Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही और पूरे साल के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। रियल एस्टेट सेक्टर की इस जानी-मानी कंपनी ने Q4 FY26 में कंसॉलिडेटेड प्री-सेल्स में पिछले साल के मुकाबले 190% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की, जो कि ₹3,547 करोड़ रही। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए कंपनी की कुल प्री-सेल्स ₹7,407 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
रिकॉर्ड कलेक्शन और कर्ज में कमी
कंपनी के लिए यह साल कलेक्शन के मामले में भी ऐतिहासिक रहा। पूरे साल में ग्राहक कलेक्शन (Customer Collections) रिकॉर्ड ₹4,258 करोड़ रहा। 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही में, Puravankara ने अपने नेट डेट (Net Debt) में ₹160 करोड़ की कटौती करने में सफलता हासिल की। इसके साथ ही, कंपनी का कुल नेट डेट घटकर ₹2,321 करोड़ रह गया है, जबकि उसके पास ₹1,695 करोड़ की नकदी और बैंक बैलेंस उपलब्ध है।
वित्तीय प्रदर्शन के मुख्य बिंदु
Q4 FY26 के लिए Puravankara का कुल इनकम ₹1,541 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि कंपनी ने ₹111 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) कमाया। यह आंकड़े इस अवधि के लिए कंपनी के मजबूत ऑपरेशनल और वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
बाजार की मांग और मूल्य निर्धारण की ताकत
कंपनी की बिक्री में यह तेजी प्रॉपर्टीज की मजबूत बाजार मांग का नतीजा है। चौथी तिमाही में औसत रियलाइजेशन (Average Realisations) में 37% की साल-दर-साल बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹11,787 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई। यह कंपनी की प्रभावी मूल्य निर्धारण रणनीतियों और ग्राहकों द्वारा स्वीकृति का संकेत देता है।
भविष्य की योजनाएं और विकास के कारक
Puravankara ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। कंपनी ₹11,200 करोड़ की प्री-सेल्स और ₹750 करोड़ के डेट में और कमी लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। विकास के मुख्य कारकों में ₹15,200 करोड़ के ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) वाले छह नए प्रोजेक्ट्स का विकास शामिल है। कमर्शियल संपत्तियों, जैसे कि एरोसिटी (Aerocity) का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate) प्राप्त करना, भी भविष्य के विकास में योगदान करने की उम्मीद है।
संभावित चुनौतियां
कंपनी के सामने कुछ जोखिम भी हैं, जिनमें डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण निर्माण लागत में 6-7% की वृद्धि शामिल है, जिसका लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक कारक भी ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं। अप्रूवल में देरी के कारण प्रोजेक्ट लॉन्च में विलंब एक और संभावित चुनौती है।
प्रमुख प्रदर्शन मेट्रिक्स:
- नेट डेट में कमी (Q4 FY26): ₹160 करोड़
- औसत रियलाइजेशन (Q4 FY26): ₹11,787 प्रति वर्ग फुट (37% YoY)
- Starworth ऑर्डर बुक: ₹2,000 करोड़ से अधिक
