Puravankara Ltd ने अपना फंड जुटाने का अभियान पूरा कर लिया है। कंपनी ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए **₹25 करोड़** की चौथी और अंतिम किश्त जारी की है, जिससे उनका **₹300 करोड़** का पूरा कर्ज कार्यक्रम संपन्न हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
Puravankara Ltd ने मिड-2025 में शुरू की गई अपनी फंड जुटाने की कवायद को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। कंपनी ने प्राइवेट प्लेसमेंट प्रोग्राम के तहत 250 अनलिस्टेड और अनरेटेड, सीनियर, सिक्योर्ड, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी किए हैं। प्रत्येक डिबेंचर की फेस वैल्यू ₹10 लाख है। इस ₹25 करोड़ की अंतिम किश्त के साथ ही कंपनी ने मई 2025 में बोर्ड द्वारा मंजूर की गई ₹300 करोड़ की कुल सीमा को पूरा कर लिया है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
यह कदम कंपनी की लिक्विडिटी रणनीति का हिस्सा था। चूँकि ये डिबेंचर्स अनलिस्टेड और अनरेटेड हैं, इसलिए इनका पब्लिक मार्केट या शेयर इक्विटी पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह कंपनी पर एक निश्चित वित्तीय बोझ (Fixed financial obligation) जरूर बनाता है, जिसे जून 2030 की मैच्योरिटी तारीख तक चुकाना होगा।
आगे क्या होगा?
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल अपने मौजूदा या भविष्य के प्रोजेक्ट्स में किस तरह करती है। कंपनी के फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में डेट-टू-इक्विटी रेशियो और इन फंड्स के एलोकेशन पर नजर रखना लॉन्ग टर्म कैश फ्लो स्टैबिलिटी को समझने के लिए जरूरी होगा।
