Prime Urban Development India ने अपने 89वें AGM की तारीख 30 सितंबर, 2026 तय की है। कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2026 में **₹0.44 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल **₹1.32 करोड़** का मुनाफा था।
बिगड़ते फाइनेंशियल हालात
कंपनी के हालिया नंबर्स काफी चिंताजनक हैं। FY26 में कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट गिरकर ₹(0.44) करोड़ के घाटे में पहुंच गया है, जबकि पिछले साल (FY25) कंपनी ने ₹1.32 करोड़ का मुनाफा कमाया था। वहीं, EBITDA भी घटकर ₹0.13 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹2.60 करोड़ था।
ऑडिटर्स की चेतावनी (Going Concern Warning)
कंपनी के स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स ने 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) को लेकर रेड फ्लैग दिखाया है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू शून्य (Nil) है और नेटवर्थ पूरी तरह इरोड हो चुकी है। ऐसे में शेयरधारकों के लिए कंपनी का भविष्य एक बड़ी चुनौती बन गया है।
स्ट्रैटेजिक बदलाव और कानूनी विवाद
कंपनी अपने बिजनेस को बचाने के लिए अब ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट सेक्टर में कदम रख रही है। साथ ही, कंपनी की सहायक कंपनियों - ATL Textile Processors Limited और New Line Buildtech Private Limited - के मर्जर की प्रक्रिया NCLT, चेन्नई के पास लंबित है।
इसके अलावा, Madras High Court में एक पुराना कानूनी विवाद भी चल रहा है। साल 2007 में Prime Mall Developers के साथ एक कंस्ट्रक्शन एग्रीमेंट के तहत दिए गए ₹13.30 करोड़ के एडवांस को लेकर आर्बिट्रेशन केस जारी है, जो बैलेंस शीट पर अब भी एक लायबिलिटी बना हुआ है।
आगे क्या?
निवेशकों को अब NCLT के अंतिम आदेश और कानूनी कार्यवाही पर नज़र रखने की जरूरत है। कंपनी की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने नए ट्रेडिंग बिजनेस से कितना रेवेन्यू जुटा पाती है।
