Prestige Estates FY26: रेवेन्यू में **70%** उछाल, प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा! निवेशकों में खुशी की लहर

REAL-ESTATE
Whalesbook Corporate News Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Prestige Estates FY26: रेवेन्यू में **70%** उछाल, प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा! निवेशकों में खुशी की लहर

Prestige Estates Projects ने FY26 में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **70.58%** बढ़कर **₹13,195.5 करोड़** हो गया, वहीं नेट प्रॉफिट (PAT) दोगुना से भी ज्यादा बढ़कर **₹1,305.4 करोड़** रहा। साथ ही, कंपनी ने सालाना बिक्री (Sales) और कलेक्शन (Collections) के भी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

Detailed Coverage

Prestige Estates Projects Ltd: FY26 का शानदार प्रदर्शन

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने नतीजे पेश कर दिए हैं, जो उम्मीदों से कहीं बेहतर हैं। Prestige Estates Projects Ltd ने ₹13,195.5 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 70.58% ज्यादा है। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) 111.61% की छलांग लगाते हुए ₹1,305.4 करोड़ पर पहुंच गया।

बिक्री और कलेक्शन ने भी बनाए रिकॉर्ड

कंपनी ने इस साल ₹30,024.5 करोड़ की सालाना बिक्री (Annual Sales) की है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके अलावा, कलेक्शन भी 53.22% बढ़कर ₹18,514.6 करोड़ रहा, यह भी एक रिकॉर्ड है।

क्यों है यह प्रदर्शन अहम?

यह शानदार नतीजे प्रॉपर्टी की मजबूत मांग और कंपनी की कुशल एग्जीक्यूशन क्षमता को दर्शाते हैं। रेवेन्यू और प्रॉफिट में भारी बढ़ोतरी, रिकॉर्ड बिक्री के साथ मिलकर, कंपनी की दमदार ग्रोथ की कहानी कह रही है। बेची गई लेकिन अभी तक रेवेन्यू में दर्ज न हुई प्रॉपर्टी का बड़ा बैकलॉग (Backlog) भविष्य की कमाई और कैश फ्लो के लिए एक मजबूत विजिबिलिटी (Visibility) प्रदान करता है।

कंपनी का बदलता चेहरा

पारंपरिक रूप से बेंगलुरु में मजबूत पकड़ रखने वाली Prestige Estates ने अब नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और मुंबई जैसे नए बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। 'The Prestige City Indirapuram' जैसी परियोजनाओं की NCR में शानदार बिक्री ने कंपनी को एक राष्ट्रीय रियल एस्टेट खिलाड़ी (National Real Estate Player) बनने की राह पर ला खड़ा किया है। इससे कंपनी की किसी एक बाजार पर निर्भरता कम हुई है।

ध्यान देने योग्य जोखिम

  • मार्केट डिमांड रिस्क: अगर अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, ब्याज दरें बढ़ती हैं, या खरीदारों का सेंटीमेंट गिरता है, तो भविष्य की बिक्री पर असर पड़ सकता है।
  • लिक्विडिटी रिस्क: नई परियोजनाओं और जमीन अधिग्रहण के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) से कैश फ्लो में दिक्कतें आ सकती हैं।
  • एग्जीक्यूशन रिस्क: प्रोजेक्ट पूरे होने में देरी से रेवेन्यू रिकग्निशन (Revenue Recognition), कलेक्शन और लागत बढ़ सकती है।

भविष्य की राह

निवेशक अब NCR और मुंबई में कंपनी की बिक्री की गति, उसके कमर्शियल और रिटेल पोर्टफोलियो के विकास, और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करते हुए एग्जीक्यूशन और लिक्विडिटी जोखिमों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की कंपनी की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.