नतीजों पर एक नज़र
Peninsula Land Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने FY26 में ₹153.68 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि FY25 में यह लॉस ₹25.27 करोड़ था। इसके अलावा, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में भी भारी गिरावट आई है, जो FY26 में घटकर ₹141.25 करोड़ रह गया, जो FY25 में ₹241.65 करोड़ था।
घाटे की असली वजह क्या है?
नेट लॉस में इस बड़ी बढ़ोतरी की मुख्य वजह कंपनी द्वारा लगाए गए असाधारण impairment charges हैं, जो कुल ₹140.25 करोड़ के रहे। ये चार्जेज़ सब्सिडियरी, जॉइंट वेंचर्स और एसोसिएट्स में लोन और निवेशों के impairment से जुड़े हैं। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी ने अपने एसेट्स की वैल्यू में भारी कमी दर्ज की है, जिसका सीधा असर उसकी प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ा है।
बाहरी फैक्टर का भी असर
कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर बाहरी फैक्टर्स का भी असर पड़ा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 14 जुलाई 2025 को कंपनी के जॉइंट वेंचर, Hem Infrastructure and Property Developers Private Limited (HIPDPL) के खिलाफ कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेसोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू की थी। Peninsula Land ने HIPDPL में अपने पूरे एक्सपोजर के लिए प्रोविजन कर लिया है।
आगे क्या?
हालांकि, कंपनी के स्टेटुटरी ऑडिटर, S R B C & Co. LLP ने अपने ऑडिट रिपोर्ट में कोई बड़ा सवाल नहीं उठाया है, लेकिन कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति पर दबाव साफ दिख रहा है। कंपनी ने FY 2026-2027 के लिए M/s. Aneja Assurance Private Limited को अपना इंटरनल ऑडिटर नियुक्त किया है। इसके अलावा, श्री नंदन ए. पिरमल को जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर री-डेजिग्नेट किया गया है, और श्री पवन स्वामी को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है।
जोखिमों पर एक नज़र
सबसे बड़ा जोखिम HIPDPL के CIRP और उससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही के कारण कंपनी के फाइनेंशियल एक्सपोजर की रिकवरी को लेकर अनिश्चितता है। इस एक्सपोजर के लिए किया गया पूरा प्रोविजन इस निवेश से जुड़े बड़े रिस्क को दर्शाता है।
