Jungle Camps India Ltd का मध्य प्रदेश के पार्सिली गांव का प्रोजेक्ट कैंसिल हो गया है। इसकी वजह यह है कि ज़मीन एक वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंदर आती है। कंपनी को उम्मीद है कि उसे अपनी प्रीमियम और सिक्योरिटी डिपॉजिट की पूरी रकम वापस मिल जाएगी। साथ ही, कंपनी ने IPO के फंड को अपने शेओपुर फोर्ट प्रोजेक्ट में लगाने का फैसला किया है।
Jungle Camps India Ltd: पार्सिली प्रोजेक्ट रद्द, कंपनी अब शेओपुर की ओर
Jungle Camps India Limited को मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड (MPTB) से एक बड़ा झटका लगा है। बोर्ड ने कंपनी का सिधी जिले के पार्सिली गांव में स्थित प्रोजेक्ट लीज रद्द कर दिया है। इसका मुख्य कारण यह है कि वह ज़मीन नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी के अंदर आती है, जिससे वहां किसी भी तरह का रिसॉर्ट बनाना कानूनी तौर पर नामुमकिन है। वन विभाग ने भी कंस्ट्रक्शन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (No-Objection Certificate) देने से मना कर दिया था।
क्या हुआ है?
Jungle Camps India Ltd को MPTB का आदेश मिला है, जिसके तहत पार्सिली में 5.950 हेक्टेयर ज़मीन का लीज एग्रीमेंट रद्द कर दिया गया है। वन विभाग ने यह साफ कर दिया था कि यह ज़मीन सेंचुरी का हिस्सा है, इसलिए वहां निर्माण कार्य की इजाज़त नहीं दी जा सकती।
यह क्यों मायने रखता है?
भले ही पार्सिली में रिसॉर्ट बनाने की योजना फेल हो गई हो, लेकिन कंपनी ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। MPTB के आदेश के अनुसार, कंपनी को अपने ₹1.22 करोड़ के अपफ्रंट बिड प्रीमियम और ₹0.50 करोड़ की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की रकम वापस मिलनी चाहिए। इसके अलावा, कंपनी जीएसटी, किराए और अन्य शुल्कों के लिए ₹0.286 करोड़ की अतिरिक्त राशि की भी मांग कर रही है, जिससे कुल वसूली ₹1.506 करोड़ तक पहुंच जाती है।
पर्दे के पीछे की कहानी
पार्सिली प्रोजेक्ट के लिए फंड कंपनी ने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए जुटाया था। अब कंपनी को शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के ज़रिए मंजूरी मिल गई है कि IPO से मिले पैसों का इस्तेमाल शेओपुर फोर्ट हेरिटेज होटल प्रोजेक्ट में किया जाए। इस बड़े रणनीतिक बदलाव से कंपनी की विस्तार योजनाएं जारी रहेंगी।
अब क्या बदलेगा?
पार्सिली प्रोजेक्ट के रद्द होने का मतलब है कि उस ज़मीन पर अब कोई विकास कार्य नहीं होगा। हालांकि, कंपनी ने पुष्टि की है कि शेओपुर फोर्ट हेरिटेज होटल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है और अब इसे कंपनी की मुख्य ग्रोथ योजना माना जा रहा है। Jungle Camps India Ltd के मौजूदा ऑपरेशनल साइट्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
जोखिम क्या हैं?
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कंपनी अपनी पूरी क्लेम की गई रकम, खासकर अतिरिक्त खर्चों की वसूली सफलतापूर्वक कर पाती है या नहीं। निवेशकों को शेओपुर फोर्ट प्रोजेक्ट की प्रगति और समय पर पूरा होने पर भी नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि अब कंपनी की विस्तार रणनीति का भार इसी प्रोजेक्ट पर है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को MPTB की ओर से कंपनी के अतिरिक्त दावों पर प्रतिक्रिया और शेओपुर फोर्ट हेरिटेज होटल प्रोजेक्ट की समग्र प्रगति पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। कंपनी की इस प्रमुख प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
