India Homes Limited ने स्टील मैन्युफैक्चरिंग से रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रखते ही मुनाफा कमाया है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी ने **₹18.66 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, हालांकि ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर आपत्तियां भी जताई गई हैं।
फाइनेंशियल टर्नअराउंड की हकीकत
कंपनी के लिए यह फाइनेंशियल ईयर टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। साल दर साल की तुलना करें, तो कंपनी ने ₹13.39 करोड़ के नुकसान से उबरकर ₹18.66 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। वहीं, रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस ₹24.50 करोड़ रहा, जो पिछले साल मात्र ₹0.01 करोड़ था। कंपनी का EBITDA भी उछलकर ₹23.35 करोड़ पहुंच गया है।
ऑडिटर्स की 'चेतावनी'
अच्छे नतीजों के बीच ऑडिटर की 'Disclaimer of Opinion' निवेशकों के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग है। ऑडिटर ने कंपनी के रिकॉर्ड्स, विशेष रूप से SAP एक्सेस में मुश्किल, ₹136.96 करोड़ की इन्वेंट्री वैल्यूएशन और संबंधित पक्षों (related-party transactions) के साथ हुए सौदों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। यह आंतरिक नियंत्रण (internal controls) की कमजोरी को दर्शाता है।
गवर्नेंस और अनुपालन (Compliance) में खामियां
सेक्रेटेरियल ऑडिट में कंपनी की कई बड़ी गलतियां सामने आई हैं:
- 2019 से प्रेफरेंस शेयर्स का रिडेम्पशन पेंडिंग है।
- BSE के नियमों के पालन में लगातार देरी।
- कई अनिवार्य कॉर्पोरेट फॉर्म भरने में विफलता, जिसके कारण रेगुलेटर्स द्वारा पेनल्टी भी लगाई गई है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को अब LLOYDS IHL LLP के जरिए खोपोली (Khopoli) लैंड होल्डिंग्स के विकास और लेवल एंटरप्राइजेज (Level Enterprises LLP) में ₹55 करोड़ तक के प्रस्तावित पूंजी निवेश पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, सुधीर एच. गुप्ता (Sudhir H. Gupta) के साथ जमीन के अधिकारों से जुड़े बड़े सौदों पर भी निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
