IndiQube Spaces ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट रेवेन्यू 37% बढ़कर ₹1,469 करोड़ हो गया, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 145% की जबरदस्त उछाल आई और यह ₹125 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी ने अपने ऑपरेशनल ग्रोथ और मजबूत डेट प्रोफाइल पर जोर दिया है।
IndiQube Spaces की जोरदार ग्रोथ, FY26 में चमकी कंपनी
नेट रेवेन्यू: ₹1,469 करोड़ | PAT: ₹125 करोड़
रीडर टेकअवे: कंपनी की इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म स्ट्रेटेजी से रेवेन्यू और PAT में मजबूत ग्रोथ; एक्सपेंशन के साथ कॉस्ट पर नजर रखना जरूरी।
क्या हुआ?
IndiQube Spaces ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए अपने फाइनेंशियल नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का नेट रेवेन्यू पिछले साल के ₹1,076 करोड़ की तुलना में 37% बढ़कर ₹1,469 करोड़ हो गया। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 145% की भारी बढ़ोतरी हुई और यह पिछले वित्त वर्ष के ₹51 करोड़ से बढ़कर ₹125 करोड़ पर पहुंच गया। EBITDA में भी 60% का इजाफा हुआ और यह ₹301 करोड़ रहा।
यह क्यों मायने रखता है?
ये आंकड़े कंपनी के शानदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और बिजनेस स्ट्रेटेजी के सफल कार्यान्वयन को दर्शाते हैं। PAT में हुई यह बड़ी वृद्धि बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी और एफिशिएंसी का संकेत देती है। कंपनी ने 0.08 के स्वस्थ डेट टू इक्विटी रेशियो को बनाए रखा है, जो एक मजबूत बैलेंस शीट को उजागर करता है।
बैकग्राउंड स्टोरी
IndiQube अपने मैनेज्ड ऑफिस स्पेस का विस्तार कर रहा है और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म अप्रोच पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कंपनी का फुटप्रिंट अब 130 सेंटरों में 9.66 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया है, जिसमें कुल 214,590 सीटों की क्षमता है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) रेवेन्यू के लिए एक प्रमुख जरिया बने हुए हैं, जो कुल रेवेन्यू का 56% योगदान करते हैं।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी के बोर्ड ने रणनीतिक विकास पहलों के लिए पूंजी का पुनर्निवेश करने हेतु FY 2025-26 के लिए कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं देने का फैसला किया है। कर्नाटक में 20 MW के सोलर फार्म जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी है, जो ESG लक्ष्यों के अनुरूप है। नवंबर 2025 में CRISIL ने कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को A+/Stable पर बरकरार रखा था।
ध्यान देने योग्य जोखिम
निवेशकों को कंपनी की उच्च ऑक्यूपेंसी लेवल्स बनाए रखने की क्षमता और नेटवर्क के विस्तार के साथ बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों को प्रबंधित करने की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए। लीज अकाउंटिंग के कारण Ind AS अकाउंटिंग लॉस और IGAAP प्रॉफिट के बीच का अंतर ध्यान देने योग्य है।
पीयर कंपैरिजन
हालांकि FY26 के लिए विशिष्ट पीयर फाइनेंशियल डेटा फाइलिंग में विस्तृत नहीं है, IndiQube का मैनेज्ड ऑफिस स्पेस में ग्रोथ और GCC क्लाइंट्स पर फोकस इसे कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट के एक प्रतिस्पर्धी सेगमेंट में रखता है।
कॉन्टेक्स्ट मेट्रिक्स (समय-आधारित)
- नेट रेवेन्यू (FY26): ₹1,469 करोड़ (FY25 में ₹1,076 करोड़ की तुलना में)
- PAT (FY26): ₹125 करोड़ (FY25 में ₹51 करोड़ की तुलना में)
- EBITDA (FY26): ₹301 करोड़ (FY25 में ₹188 करोड़ की तुलना में)
- कुल AUM: 9.66 मिलियन वर्ग फुट
- कुल सीट्स: 214,590
- GCC का योगदान: 56% रेवेन्यू, 49% ऑक्यूपाइड एरिया
- डेट टू इक्विटी रेशियो: 0.08
- EPS (FY26): ₹6.1
आगे क्या ट्रैक करें?
कंपनी के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस, ऑक्यूपेंसी रेट्स और DesignQube, IndiQare, और MiQube जैसी अपनी विभिन्न सर्विस पेशकशों के सफल इंटीग्रेशन पर ध्यान केंद्रित करें। भविष्य की पूंजीगत व्यय योजनाएं और लाभप्रदता पर उनका प्रभाव प्रमुख संकेतक होंगे।
