Hubtown ने FY26 के लिए **₹168.08 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के **₹55.18 करोड़** के मुकाबले काफी ज्यादा है। हालांकि, कंपनी अब कानूनी और ऑडिट संबंधी मुश्किलों में घिरी दिख रही है।
मुनाफे का गणित और विवाद
कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू भी पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹408.47 करोड़ से बढ़कर इस बार ₹643.51 करोड़ पर पहुंच गया है। लेकिन, इतनी ग्रोथ के बावजूद ऑडिटर्स (M/s. JBTM & Associates LLP) ने नतीजों पर सवाल उठाए हैं। कंपनी ने इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट पर ₹17.52 करोड़ के ब्याज खर्च का प्रावधान नहीं किया है, जिससे निवेशकों को शक है कि रिपोर्ट किया गया मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है।
MCA की जांच का साया
सबसे बड़ी चिंता का विषय Ministry of Corporate Affairs (MCA) की जांच है। कंपनी ने खुलासा किया है कि MCA ने साल 2014 से 2025 तक के कामकाज की जांच के लिए कंपनी के टॉप मैनेजमेंट, जिसमें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और MD शामिल हैं, को समन भेजा है। यह गवर्नेंस को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।
ऑपरेशन्स पर एक नजर
कंपनी के पास लगभग 34.17 मिलियन स्क्वायर फीट का डेवलपमेंट पोटेंशियल है। '25 South' और 'Rising City' जैसे प्रोजेक्ट्स अपने अंतिम चरण में हैं और कई टावर्स को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट भी मिल चुके हैं। लेकिन, एक्सचेंज द्वारा कुछ रिस्ट्रक्चरिंग प्लांस को रिजेक्ट किए जाने से पहले ही शेयरधारकों का भरोसा डगमगाया हुआ था।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
MCA जांच का भविष्य और ऑडिटर्स द्वारा जताई गई आपत्तियों का समाधान निवेशकों के लिए सबसे अहम होगा। जब तक इन कानूनी और वित्तीय उलझनों पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक स्टॉक की वैल्यूएशन को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।
