Harig Crankshafts ने अपनी इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब कंपनी अपना बिजनेस मॉडल बदलकर ऑटो मैन्युफैक्चरिंग से सीधे रियल एस्टेट सेक्टर में उतर चुकी है, जिसके नतीजे शानदार रहे हैं।
मुनाफे में धमाकेदार वापसी
इंसॉल्वेंसी से उबरने के बाद कंपनी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹10.33 करोड़ रहा है, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में कंपनी को ₹54.33 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस साल कंपनी का रेवेन्यू ₹20.86 करोड़ दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा शून्य था।
रियल एस्टेट की राह पर कंपनी
कंपनी ने NCLT द्वारा मंजूर किए गए रेजोल्यूशन प्लान के तहत अपना बिजनेस मॉडल पूरी तरह बदल लिया है। अब Harig Crankshafts ने अपने पुराने ऑटोमोबाइल crankshaft मैन्युफैक्चरिंग काम को हमेशा के लिए बंद कर दिया है, जो FY2011 से बंद पड़ा था। अब कंपनी का पूरा ध्यान रियल एस्टेट डेवलपमेंट और सिविल इंजीनियरिंग पर है।
नई वर्किंग कैपिटल और लोन का प्लान
अपने इस नए सफर को रफ्तार देने के लिए कंपनी ने ₹6 करोड़ का लोन लेने का फैसला किया है। इसके लिए कंपनी Chemester Food Industry Pvt Ltd से पैसा जुटाएगी, जिस पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी का इंतजार है।
ध्यान देने वाली चुनौतियां (Risk Factors)
हालांकि कंपनी मुनाफे में आ गई है, लेकिन अभी भी कुछ पुराने विवाद बाकी हैं। ऑडिटर्स ने 2012 से 2024 के बीच की टैक्स फाइलिंग पर कुछ सवाल खड़े किए हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि ये पुराने मालिकों के समय की दिक्कतें हैं, लेकिन ये अभी भी कंपनी की बैलेंस शीट पर एक 'compliance friction' की तरह बने हुए हैं। साथ ही, कंपनी की नेट वर्थ अभी भी नेगेटिव बनी हुई है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
