EFC (I) Ltd के निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट है। NCLT ने कंपनी के डीमर्जर प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए शेयरधारकों और क्रेडिटर्स की मीटिंग की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। इससे कंपनी अपने एसेट-लाइट और एसेट-इंटेन्सिव बिजनेस को अलग करने के करीब पहुंच गई है।
डीमर्जर से क्या बदलेगा?
इस प्रक्रिया के जरिए कंपनी अब अपने बिजनेस को दो अलग-अलग वर्टिकल्स में बांट रही है। इसमें मैनेज्ड ऑफिस सॉल्यूशंस का हिस्सा, जो एसेट-लाइट मॉडल पर आधारित है, उसे नई कंपनी (Resulting Company) में ट्रांसफर किया जाएगा। वहीं, मालिकाना हक वाली रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज EFC Ltd के पास ही रहेंगी। कंपनी का लक्ष्य इस बंटवारे से दोनों बिजनेस को स्वतंत्र कैपिटल स्ट्रक्चर और फोकस के साथ आगे बढ़ाना है।
फाइनेंशियल्स पर एक नजर
इस रीस्ट्रक्चरिंग के बाद 'Resulting Company' की नेट वर्थ ₹716.34 करोड़ और डीमर्ज्ड कंपनी की नेट वर्थ ₹208.79 करोड़ रहने का अनुमान है। चूंकि EFC Ltd पहले से ही EFC (I) Ltd की सब्सिडियरी है, इसलिए इस प्रक्रिया में कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे।
आगे की राह
कंपनी ने 21 सितंबर, 2026 को NCLT से यह औपचारिक आदेश प्राप्त किया है। अब कंपनी को रीजनल डायरेक्टर, इनकम टैक्स विभाग और GST अथॉरिटीज को नोटिस भेजना होगा। यदि 30 दिनों के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती है, तो इसे मंजूरी मान लिया जाएगा। निवेशकों को अब कंपनी की ओर से आने वाले अगले रेगुलेटरी फाइलिंग्स और डीमर्जर की फाइनल टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए।
