Brookfield India REIT ने वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी के नेट ऑपरेटिंग इनकम (NOI) में **51.7%** की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा **₹756.6 करोड़** रहा। इसके साथ ही, कंपनी ने मुंबई के प्रतिष्ठित Godrej BKC में **₹1,700 करोड़** की एक बड़ी प्रॉपर्टी का अधिग्रहण भी किया है।
दमदार नतीजों से Brookfield India REIT की तूफानी शुरुआत
Brookfield India Real Estate Trust REIT ने वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने अपने निवेशकों को खुश करते हुए नेट ऑपरेटिंग इनकम (NOI) में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 51.7% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है, जो कि ₹756.6 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस भी 51.5% बढ़कर ₹973.8 करोड़ हो गया है।
लीजिंग और ऑक्यूपेंसी में भी मजबूत पकड़
REIT ने 11 लाख वर्ग फुट (MSF) की सकल लीजिंग (Gross Leasing) हासिल की है। सबसे खास बात यह है कि कंपनी ने अपनी संपत्तियों में 93% की मजबूत ऑक्यूपेंसी रेट बनाए रखी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि Brookfield India REIT के एसेट्स की मांग काफी अच्छी है और कंपनी अपने किरायेदारों को बनाए रखने में कामयाब रही है।
मुंबई में ₹1,700 करोड़ का बड़ा दांव
नतीजों के साथ ही, Brookfield India REIT ने एक और बड़ी घोषणा की है। कंपनी मुंबई के प्राइम लोकेशन, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में Godrej BKC की तीन ऑफिस फ्लोर्स में 50% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने जा रही है। इस सौदे का कुल एंटरप्राइज वैल्यू ₹1,700 करोड़ है, जो Parthos Properties Private Limited के माध्यम से किया जाएगा। यह कदम REIT के पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगा और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में उसकी उपस्थिति को बढ़ाएगा।
निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
इस मजबूत प्रदर्शन से पता चलता है कि कंपनी परिचालन दक्षता (operational efficiency) में अव्वल है। ₹5.60 प्रति यूनिट का डिस्ट्रीब्यूशन पर यूनिट (DPU) निवेशकों को एक स्थिर आय का जरिया प्रदान करता है, साथ ही भविष्य में ग्रोथ की उम्मीदें भी बढ़ाता है। कंपनी का 15% DPU ग्रोथ का लक्ष्य आय-केंद्रित निवेशकों के लिए एक स्पष्ट संकेत है। इसके अलावा, कंपनी की डुअल AAA क्रेडिट रेटिंग उसकी वित्तीय स्थिरता को दर्शाती है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को अब Godrej BKC के अधिग्रहण पर नजर रखनी होगी, खासकर शेयरधारक और नियामक स्वीकृतियों को लेकर। इसके अलावा, पोर्टफोलियो में लीजिंग की गति और बाजार की व्यापक आर्थिक चालें भी महत्वपूर्ण होंगी।
